पटनाः 15 साल पहले गलती से चले गए थे सीमा पार, पाकिस्तान जेल से लौटे तो बोल तक नहीं पा रहे रामचंद्र
पटना। बिहार की राजधानी पटना स्थित भवानीपुर काशीचक गांव के रहने वाले रामचंद्र करीब 15 साल बाद अपने वतन लौटे हैं। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की अलग-अलग जेलों में मानसिक व शारीरिक यातनाओं को झेला। पाकिस्तान रेंजर अधिकारी मोहम्मद फैजल ने अटारी-वाघा सीमा पर रामचंद्र को बीएसएफ अधिकारी अनिल चौहान को सौंपा। बीएसएफ ने दस्तावेज की जांच कर रामचंद्र को अटारी सड़क सीमा पर स्थित पंजाब पुलिस की चौकी काहनगढ़ पुलिस को सौंप दिया।

रामचंद्र के हालात को देखकर ऐसा लग रहा था कि उन्हें मानसिक और शारीरिक तौर पर काफी प्रताड़ित किया गया है। वह ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था। अटारी पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह डेरा बाबा नानक सीमा से गलती से पाकिस्तान में घुस गए थे, जहां उन्हें पाकिस्तानी रेंजरों ने गिरफ्तार कर लिया था।
अटारी सीमा पर तैनात पंजाब पुलिस के प्रोटोकाल अधिकारी अरुण पाल सिंह ने बताया कि बुधवार को बीएसएफ अधिकारियों ने उन्हें बताया कि पाकिस्तान रेंजर एक भारतीय को रिहा कर भेज रहे हैं। रामचंद्र को बोलने में भी कठिनाई आ रही थी। उनके परिजन एक दो दिन में यहां पहुंच जाएंगे।
दस्तावेज पूरे करने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया जाएगा। परिवार ने बताया है कि रामचंद्र की शादी हो चुकी है और दो बच्चे भी हैं। परिजनों के अनुसार, 15 साल पहले रामचंद्र घर से लापता हो गए थे, तब उनकी उम्र 43 साल थी। वह खेतीबाड़ी और मजदूरी करते थे।
बीएसएफ अधिकारियों के आदेश के बाद पंजाब पुलिस ने रामचंद्र को अदालत में पेश नहीं किया। प्रोटोकॉल अधिकारी के अनुसार चूंकि उनके परिजनों के साथ बातचीत कर ली गई है, इसलिए अब उसे परिजनों को सौंपने की औपचारिकता ही पूरी की जाएगी।
पाकिस्तान द्वारा रिहा किए जाने वाले भारतीयों को प्रताड़ित करने की यह पहली घटना नहीं है। पाकिस्तान से लौटे कई भारतीय यातनाओं के कारण मानसिक रूप से विकृत होकर लौटे हैं। उन्हें अमृतसर स्थित सरकारी मेंटल अस्पताल में दाखिल करवाया जाता था। इनमें से कई भारतीय आज भी वहां दाखिल हैं। पाकिस्तान से लौटे यह लोग अपने घर का पता तक नहीं बता पाए थे।












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