बिहार के 11 क्षेत्र जिन पर खर्च होने चाहिये 1.65 लाख करोड़ रुपए
पटना। इस बार बिहार विधानसभा चुनाव केवल राजनीतिक द्वंद नहीं बल्कि दो व्यक्तियों के बीच साख की लड़ाई बन चुकी है। एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ये साबित करना चाहते हैं कि 17 साल पुरानी दोस्ती तोड़कर उन्होंने कुछ गलत नहीं किया तो दूसरी ओर भाजपा इस बात को साबित करने में जुटी हुई है कि भले ही वो दिल्ली चुनाव में करिश्मा न कर पाई हो, लेकिन मोदी मैजिक अभी भी जारी है। ऐसे में इस आर-पार की लड़ाई में भाजपा और जेडीयू दोनों अपना पलड़ा भारी दिखाने में जुटी हुई है।
इसी क्रम में आज पीएम नरेन्द्र मोदी ने नीतीश के गढ़ में आकर न केवल उन्हें खुली चुनौती दी बल्कि 1.25 करोड़ के पैकेज का ऐलान कर बिहार की जनता का मूड अपनी ओर खींचने के बड़े प्रयास किये हैं। जहां पीएम ने खुलासा किया कि बिहार कि जनता पहले दिए पैकेजों को भी खर्च नहीं कर पाई है तो ऐसे में सबसे बड़ा सवाल कि मोदी के इस खास तोहफे का इस्तेमाल कहां-कहां होना चाहिए। इस बात में कोई दोराय नहीं कि बिहार पिछड़े राज्यों की सूची में शामिल है। बुनियादी सुविधाएं भी मौजूद नहीं है। ऐसे में इस 1.25 करोड़ पैकेज का इस्तेमाल कहां और कैसे होना चाहिए, इसे जानते है...
जरूरी क्षेत्रों की बात करते हैं स्लाइडर में तस्वीरों के साथ।

किसानों के हितों के लिए
इस पैकेज में से एक बड़ा हिस्सा कृषि विश्वविद्याल के स्तर में सुधार लाने, नये शोध संस्थान खोलने के साथ- साथ पानी की व्यवस्था और अनाज के लिए बेहतर गोदाम बनाने जैसे कामों के लिए होना चाहिए।

शिक्षा के लिए
बिहार में शिक्षा का स्तर क्या है इसे बोर्ड परीक्षा के दौरान नकल की उस फोटो ने साबित कर दिया था, जो सोशल मीडिया पर वाइरल हुई थी। ऐसे में बिहार के होनहार अच्छी शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रास्ता पकड़ लेते है। ऐसे में इस राशि का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा के लिए रखा गया है। इसमें भागलपुर के नजदीक एक केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की योजना है इसके अलावा आईआईएम बोधगया के नजदीक खोलने की योजना भी है।

स्किल डवलेंपमेंट
बेरोजगारी की समस्या दूर करने के लिए बिहार के नौजवानों को स्किल्ड करने की बहुत आवश्यकता है। यहां के युवाओं के स्किल डेवलपमेंट के तौर पर भी उचित बजट की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में
बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते हर साल सैंकड़ों लोग जैपनीज़ इंसेफलाइटिस का शिकार हो जाते हैं। बिहार में स्वास्थ सुविधा में सुधार के लिए इस पैकेज का इस्तेमाल होना चाहिए। मेडिकल कॉलेज का स्तर सुधारने, भागलपुर, पटना औऱ गया के मेडिकल कॉलेज में उचित सुविधाएं मुहैया करानी चाहिये।

बहुत जरूरी बिजली
बिहार में बिजली के मुद्दे को लेकर हर राजनीतिक दल यहां की जनता को लुभाने की कोशिश करती है। नीतीश कुमार ने भी जनता को 24 घंटे बिजली देने का वादा किया था, जो आज तक पूरा नहीं हो पाया। ऐसे में मोदी सरकार के इस खास पैकेज से कुछ हिस्सा बिजली परियोजनाओं के लिए भी आवंटित किया जाना चाहिए।

गांव तक सड़क
बिहार को दिए जाने वाले इस पैकेज में से 16130 करोड़ की राशि आवंटित गांवों की सड़कों पर खर्च किया जाएगा। जो सड़कें उसे शहरों से जोड़ेगी।

हाइवे का निर्माण
बिहार के शहर में फ्लाइओवर और नेशनल हाइवे के निर्माण, नेशनल हाइवे बनाने, उसके चौड़ीकरण के लिए भी सरकार को इस राशि से कुछ हिस्सा आवंटित करना चाहिए।

एयरपोर्ट की जरूरत
पटना में बेहतर एयरपोर्ट बनाने के साथ-साथ रक्सौल और पुर्णियां में एयरपोर्ट में विकास के लिए भी इस धन से कुछ हिस्सा खर्च किया जाना चाहिए।

डिजिटल बिहार
बिहार को डिजिटल बनाने के लिए इस राशि से कुछ हिस्सा आवंटित होना चाहिए। इस योजना के तहत साफ्टवेयर ट्रेनिग सेंटर, 1 हजार नये मोबाइल टावर, वाईफाई पर ध्यान दिया जाएगा।

पर्यटन के क्षेत्र में
बिहार में पर्यटन के विकास पर जोर देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार कई बार चर्चा कर चुकी है। लेकिन अब तक ऐसा हो नहीं पाया है। उम्मीद है कि मोदी सरकार के इस पैकेज से पर्यटन पर भी कुछ राशि खर्च की जाएगी।

रोजगार की जरूरत
बिहार में बेरोजगारी सबसे अहम मुद्दा रहा है। यहां के युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर रुख कर लेते हैं। ऐसे में यहां रोजगार की उचित व्यवस्था के लिए भी राशि आवंटित की जानी चाहिए।












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