मोदी इफेक्ट के चलते नीतीश को मजबूरी में देना पड़ा इस्तीफ

मोदी की महाविजय ने बिहार में राजनीतिक भूकंप ला दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मोदी की आंधी से हिल गए है। उन्होंने बिहार में जेडीयू की हार की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। मंत्रीमंडल भंग कर दिया और राज्यपाल से विधानसभा भंग करने की सिफारिश की है, लेकिन क्या बिहार में आई इस आंधी की वजह मोदी है।
मोदी इफेक्ट का साइट इफेक्ट
नीतीश कुमार भले ही हार की नौतिक जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा देने की बात कर रहे हो, लेकिन सच्चाई यहीं है कि उनकी सरकार पहले से बैसाखियों के सहारे चल रही थी। आंकड़ों को देखे तो 243 सीटों वाले बिहार विधानसभा में जेडीयू के पास 114 सीटें है। कांग्रेस के 4 और 4 निर्दलीय विधायकों के समर्थन ने जेडीयू ने बहुमत का आंकड़ा(122) छूआ है। भाजपा से संबंध तोड़ने के बाद नीतीश की सरकार अल्पमत में थी।
बिहार में भाजपा से संबंध तोड़ने के साथ ही नीतीश कुमार का पतन शुरु हो गया था। जिस पार्टी को 2009 के लोकसभा चुनाव में 22 सीटें मिली थी उसे इस बार मात्र 2 सीटों से संतोष करा पड़ा है। भीतरखाने से तो ये भी खबर आ रही थी कि नीतीश पर अपने ही विधायकों का दवाब बढ़ता जा रहा था। सूत्र बताते है कि लोकसभा चुनाव में करारी की वजह जेडीयू के विधायक नीतीश के भाजपा से संबंध तोड़ने को मानते है। नीतीश के इसी फैसले से नाराज जेडीयू के कुछ विधायक पार्टी छोड़ने का मन बना रहे थे। ऐसे में सरकार गिरे इससे पहले ही नीतीश ने नौतिक जिम्मेदारी के बहाने इस्तीफा देकर अपनी इज्जत बचाने की कोशिश की है।
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब क्या बनती है स्थिति
बिहार विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में अभी डेढ़ साल का वक्त बचा हुआ है। ऐसे में दो स्थिति बनती दिख रही है। यहां तो दल-बदल कानून के तहत जेडीयू के कुछ विधायक भाजपा के साथ आ सकते है। जिस के बाद बिहार में भाजपा की सरकार बन सकती है। या फिर विधानसभा भंग कर दोबारा चुनाव कराए जाएगे।












Click it and Unblock the Notifications