बिहार: कॉपी कोड हटा कर बच्चा राय की बेटी को कराया गया टॉप

पटना। बिहार स्टेट टॉपर घोटाला जिसने बिहार के साथ साथ पूरे देश में बिहार में चल रहे शिक्षा व्यवस्था की किरकिरी कर दी है। जिसे देखते हुए सूबे की सरकार ने बिहार के सभी स्टेट टॉपर के खिलाफ मामला दर्ज करने तथा गिरफ्तारी का आदेश दे दिया है। लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं स्टेट टॉपर से जुड़ी कई ऐसी बात जिसे सुनकर आप दांतो तले उंगली दबाने लगेंगे। टॉपर घोटाले की इस धंधे में कई सफेदपोश लोगों के साथ साथ एक बहुत बड़ा नेटवर्क चल रहा था। लेकिन पुलिस अब तक इन लोगों की पहुंच से बहुत दूर है।

बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद का बड़ा रोल

बिहार बोर्ड के अध्यक्ष लाल केशव प्रसाद ने शिक्षा विभाग में हुए धांधली को देखते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा के बाद लालकेश्वर के कई ऐसे काले कारनामे धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। जिसे देखकर या लगता है कि टॉपर घोटाले में बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद का मुख्य योगदान था। लालकेश्वर और बच्चा राय के साथ-साथ कई ऐसे सफेदपोश लोग इस रैकेट में शामिल हैं, जिनकी मिलीभगत से इस तरह का खेल खेला जा रहा था।

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विशु राय कॉलेज के प्रिंसिपल बच्चा राय की बेटी भी इस बार इंटर मीडिएट का एग्जाम दे रही थी। विशु राय कॉलेज की इंटर साइंस, इंटर आर्ट्स और कॉमर्स की परीक्षा की कॉपियां आरा के महाराजा कॉलेज, भभुआ के एसबीपी कॉलेज तथा भागलपुर के जिला स्कूल में आर्ट्स की कॉपी, गया के एएम कॉलेज में कॉमर्स की कॉपी में जांच के लिए भेजी गई थी। गोपनीयता बरकरार रखने के लिये कॉपियों में से जिले का नाम हटा कर कोड डाल दिया जाता है।

पटना पहुंचायी गईं कॉपियां

सभी कॉपियों को गुप्त तरीके से भेजा जा रहा था, लेकिन बीच में ही रातोरात कुछ ऐसा हुआ कि विशुन राय कॉलेज समेत खगड़िया और गोपालगंज के दो कॉलेज की कॉपियां पटना के राजेंद्र नगर बॉयज हाई स्कूल में पहुंचा दी गईं। यही वो स्कूल है, जहां उन बच्चों की कॉपी जांची गई, जो टॉपर लिस्ट में सबसे ऊपर रहे। चूंकि ये सभी कॉपियां लालकेश्‍वर प्रसाद के दफ्तर से होते हुए आयीं, इसलिये ऐसा माना जा रहा है कि इस खेल में लालकेश्‍वर का भी हाथ है।

बच्चा राय की बेटी शालिनी थी गुपचुप टॉपर

टॉपर घोटाला उजागर होने के बाद पता चला है कि राज्य में साइंस के टॉपर सौरव श्रेष्ठ नहीं, बल्कि विशुन राय कॉलेज के प्रिंसिपल बच्चा राय की बेटी शालिनी है। जिसका नाम बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद और बच्चा राय के इशारे पर मेरिट लिस्ट में नहीं डाला गया।

शिक्षा माफियाओं का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस ने सबसे पहले बच्चा राय की बेटी शालिनी के नाम मामला दर्ज किया है। शालिनी वर्ष 2014 के मैट्रिक परीक्षा में स्टेट टॉपर थी। जिसे इंटर में भी टॉप करा दिया गया, लेकिन किसी को पता नहीं चले, इसलिये यह खुलासा नहीं किया गया। नकल माफियाओं ने शालिनी की कॉपी से कोड फाड़ दिया, जिसकी वजह से उसका परिणाम लंबित हो गया। बोर्ड की वेबसाइट पर भी शालिनी का नाम कहीं नजर नहीं आ रहा है। हालांकि पुलिस के हाथ शालिनी की कॉपी लग गई है। जिसमे शालिनी को सौरभ से ज्यादा अंक दिए गए हैं।

बच्चा राजद तो लालकेश्वर जदयू के टिकट का था दावेदार

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि बच्चा राय आरजेडी का नेता है। वहीं लाल केश्वर प्रसाद की पत्नी उषा सिन्हा जदयू की। वर्ष 2015 के लोकसभा चुनाव के दौरान बच्चा राय लालू यादव के साथ कई बार मंच पर दिखे थे। कांटी और महुआ विधानसभा क्षेत्र से राजद के टिकट के दावेदार भी थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया था।

लालकेश्वर प्रसाद सिंह की पत्नी उषा सिन्हा पिछले कई वर्षों से कंकड़बाग स्थित गंगा देवी महिला महाविद्यालय की प्राचार्य हैं। 2010 के विधानसभा चुनाव में तिकड़म कर उन्होंने हिलसा विधानसभा सभा से जदयू का टिकट पाने में सफलता तो हासिल की ही, विधायक भी बन गईं। पर पिछले वर्ष हुए विधान सभा चुनाव में यह सीट राजद कोटे में चली गई जहां से राजद उम्मीदवार शक्ति सिंह यादव निर्वाचित हुए।

2010 से फरवरी 2016 तक वे अपने कॉलेज से अवकाश पर रहीं। तब तक उनकी जगह इसी महाविद्यालय में कार्यरत श्रीमति कंचन चकियार को प्रभारी प्रिंसिपल बनाया गया था। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि बीते विधान सभा चुनाव में भी लालकेश्वर सिन्हा अपनी पत्नी उषा सिन्हा को फिर से टिकट दिलाने के लिए काफी प्रयासरत थे।

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