यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को जब मिला झूठा आश्वासन और नहीं मिली बस फिर... छात्रा ने सुनाई दास्तां
यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को जल्द से जल्द वतन वापसी का इंतज़ार है। भारत सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही है कि यूक्रेन में फंसे सभी भारतीय लोगों सकुशल घर वापसी कराई जा सके।
पटना, 03 मार्च 2022। यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को जल्द से जल्द वतन वापसी का इंतज़ार है। भारत सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही है कि यूक्रेन में फंसे सभी भारतीय लोगों सकुशल घर वापसी कराई जा सके। वहीं कुछ छात्रों का कहना है कि सरकार की तरफ़ से उन्हें अभी तक कोई मदद नहीं मिल पाई है। बेगूसराय (बिहार) जिला के बीहट गांव की बेटी भानुप्रिया अपने साथी छात्रों के साथ रोमानिया बॉर्डर पर फंसी हुई हैं। उन्होंने वन इंडिया हिंदी से खास बातचीत करते हुए यूक्रेन का आंखों देखा हाल बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। रोमानिया के शेल्टर होम में आने के बाद पहले से सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

छात्रों ने ली शेल्टर होम में पनाह
भानुप्रिया ने बताया कि दो दिन पहले वह अपने साथी छात्रों के साथ कीव से निकली थी। ट्रेन में जगह बिलकुल भी नहीं थी कुल छह छात्रों के साथ वह काफ़ी धक्का मुक्कि करते हुए ट्रेन पर चढ़ीं। उसके बाद रोमानिया बॉर्डर से 25 कीलोमीटर पहले ही उन लोगों को धक्के मार कर ट्रेन से उतार दिया गया। ट्रेन से उतरने के बाद वह जब रोमानिया बॉर्डर के लिए सवारी ढूंढ रही थी तो ट्रैवेल एजेंट और स्थानीय प्रशासन ने कुछ ही दूरी तय करने के काफ़ी ज़्यादा पैसे मांगे। उसके बाद 30 छात्रों ने मिलकर रुपयों ( 600 रुपये प्रती छात्र, भारतीय मुद्रा) का इंतज़ाम किया और बस वाले को दिया जब जाकर बस वाले ने उन्हे बॉर्डर तक पहुंचाया। उसके बाद सभी छात्रों ने शेल्टर होम ढूंढा और वहां पनाह ली।

भारत सरकार ने नहीं किसी भी तरह की मदद
भानुप्रिया से जब यह सवाल किया गया कि क्या आपको भारत सरकार की तरफ़ से कोई मदद नहीं मिली ? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब इंडियन एम्बेसी को छात्रों ने कॉल किया था तो वहां से यह जवाब मिला कि कीव में ख़तरा है आप लोग वहां से अपने रिस्क पर निकल जाएं। जब सभी छात्रों ने अपने रिस्क पर कूच किया और लगातार इंडियन एम्बेसी से संपर्क साधने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि रोमानिया बॉर्डर के लिए आप लोगों के लिए इंडियन एम्बेसी की तरफ़ बस मुहैय्या करवा दी गई है, जो आप लोगों को रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचा देगी । छात्रों ने इस आश्वासन पर कूच तो किया लेकिन उन्हें कोई बस नहीं मिली और उन लोगों ने रोमानिया के शेल्टर होम तक का सफ़र अपने ही बलबूते पर तय किया। बॉर्डर के शेल्टर होम पहुंचने के बाद सभी छात्र पहले से ज़्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। शेल्टर होम में खाने के लिए जो भी मुमकिन हो पा रहा है वहां के लोग उपलब्ध करवा रहे हैं। सोने के लिए कम्बल और बिछाने के लिए मैट्रेस दिया गया है, कुल मिलाकर स्थिति यहां की सही है।

छात्रों ने सरकार से की वतन वापसी कराने की अपील
बीहट की बेटी भानुप्रिया ने बताया कि रोमानिया के शेल्टर होम में थोड़ी सी परेशानी वाशरूम की है क्योंकि बॉस्केटबॉल कोर्ट को ही शेल्टर होम में तब्दील किया गया है। इस वजह से यहा ज़्यादे वाशरूम नहीं है और लोग काफ़ी हैं। वहीं उन्होंने कहा कि क़रीब दो हज़ार से ज़्यादे छात्र हवाई अड्डे पर घर जाने के लिए कतार में खड़े हैं, उन लोगों के जाने के बाद तीन से चार दिन में हम लोगों की वतन वापसी की उम्मीद है। इसके साथ ही भानुप्रिया ने कहा कि मेरे साथ जितने भी छात्र मौजूद हैं पूरे यूक्रेन में भारत सरकार ने हम लोगों की कोई मदद नहीं की हम लोगों ने शेल्टर होम तक का सफ़र अपने भरोसे ही तय किया है। लेकिन अब आपको चैनल के ज़रिए हम सरकार से अपील करते हैं कि कुछ पहल कर यूक्रेन में फंसे सभी छात्रों को सकुशल वतन वापसी का प्रबंध करवाएं।
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