गया के तालिबानियों पर कौन लेगा एक्शन?
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) बिहार के गया शहर में जो कुछ घटा उसकी बात होनी चाहिए।क्योंकि यह तालिबान वाले अफगानिस्तान में नहीं हुई बल्कि सुसंस्कृत संवेदनशील और 21 वीं शताब्दी और परिपक्व भारतीय समाज में हुई।
जिंदा मार देने की सजा
दरअसल गया में पंचायत ने एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की और उसके 38 वर्षीय प्रेमी को ज़िन्दा जलाकर मार देने की सज़ा सुनाई और उनको जला कर मार दिया गया, और बयान दिया जाने लगा कि इन दोनों के आपस में नाजायज़ शारीरिक संबंध थे।
कहीं कोई चर्चा नहीं
इसकी चर्चा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक दो बाईट के अतिरिक्त सोशल मीडिया पर बिल्कुल नहीं हुई क्योंकि यह भारत में हुई।
देखो उनका विलाप
इलाहाबाद के वरिष्ठ चिंतक मोहम्मद जाहिद कहते हैं कि यदि यही घटना अफगानिस्तान, इराक, पाकिस्तान या सीरिया में हुई होती तो तथाकथित राष्ट्रवादियों की चिन्ता और विधवा विलाप देखते बनता।
चुप्पी की वजह
परन्तु यहाँ सब चुप हैं। क्यों? ये सभी समझ सकते हैं कि विष किसी भी अवसर की प्रतीक्षा में रहता है बाहर निकलने के लिए, और ऐसी हर घटना पर इनका निशाना भारत में ही एक वर्ग रहा है।
ऐसे ही कुछ दिन पूर्व एक प्रेमी युगल को पेड़ से लटका पाया गया और हत्या या आत्महत्या में जांच उलझा दी गई, ये मात्र कुछ दिन पूर्व की घटनाएं हैं और ऐसी घटनाएं समय-समय पर सामने आती ही रहती हैं।
यह ऐसी घटनाएं हैं जो सामने आ जाती हैं, भारत के दूर दराज गांवों में जहाँ पैदल के अतिरिक्त और कोई साधन नहीं वहाँ ऐसी घटनाएं होने पर सामने आना संभव ही नहीं।
निंदनीय घटनाएं
जाहिद कहते हैं कि यह सब घटनाएं निन्दनीय हैं चाहे भारत में हो या कहीं भी परन्तु यदि भारत में ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो हम किस मुँह से विदेश में घटी घटनाओं पर स्यापा करने का हक रखते हैं। यह विचारणीय प्रश्न है?













Click it and Unblock the Notifications