बिहार में चल रहा 'खून' का खेल, जिम्मेदार राजनीति में व्यस्त

इस धंधे में सरकार, प्रशासन और दलाल, सभी शामिल रहते हैं। जानकारों की मानें, तो केवल पटना में ही हर दिन लाखों रुपये के खून की बिक्री की जाती है। शुक्रवार की देर रात पीएमसीएच से पकड़े गये खून के व्यापारी इसी खेल की एक छोटी-सी मछली है, लेकिन इससे जुड़ी बड़ी मछलियों को कभी नहीं पकड़ा जा सका है।
पवार पर जिद सवार
सिंगल यूनिट का गोरखधंधा : संवाददाता मुकुन्द बिहार ने बताया कि राजधानी में धड़ल्ले से सिंगल यूनिट का गोरखधंधा चलता है। इस प्रक्रिया में किसी भी मरीज को खून चढ़ाने के बस एक डोनर की जरूरत होती है। डोनर मिलने के बाद तुरंत वहीं पर खून निकाला जाता है और चढ़ा भी दिया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया में ब्लड चढ़ाने के पहले एक बार भी यह जांच नहीं की जाती है कि डोनर पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है या नहीं? सिंगल यूनिट सिस्टम के लिए भी ड्रग कंट्रोलर से लाइसेंस लेने की जरूरत होती है, पर इसकी परवाह कौन करता है। इस पूरे खेल में अस्पताल संचालक डोनर का भी इंतजाम कर देते हैं, जिसके एवज में हजारों लूट लेते हैं।
कहां से खून लाते हैं निजी ब्लड बैंक : राजधानी में चलनेवाले निजी ब्लड बैंक प्रोफेशनल डोनर के माध्यम से रक्त लाते हैं, जिसे पैक कर स्टोर में रख देते हैं. प्रोफेशनल डोनर गांधी मैदान के कारगिल चौक के पास बैठे रहते हैं, जिन्हें कोई भी पहचान सकता है। वह जहां भी बैठते हैं, अपने पास एक लाल कपड़ा रखते हैं या वहां के पेड़ पर लटका रहता है।
डोनर को ब्लड बैंक में काम करनेवाले दलालों के माध्यम से लाया जाता है, जिन्हें 200 से लेकर 600 रुपये तक दिया जाता है, लेकिन उसी खून को 3000 से 5000 तक में बेचा जाता है।
क्या कहते हैं अधिकारी : पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ लखींद्र प्रसाद कहते हैं कि खून के दलालों पर नकेल लगाने के लिए कड़े कदम उठाये जायेंगे। इसमें जो दोषी लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी। हालांकि अभी तक तो राज्य की व्यवस्था राजनैतिक उथल-पुथल में उलझी दिखई दे रही है।












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