Toda Shawl: आखिर कितनी खास है ये 'टोडा शॉल'? जिसे पीएम मोदी ने सेशेल्स के स्पीकर को तोहफे में दिया
PM Narendra Modi Seychelles Gift: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली के स्पीकर को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक एक खास उपहार भेंट किया। यह उपहार था तमिलनाडु के नीलगिरि पहाड़ों में रहने वाले टोडा समुदाय की पारंपरिक टोडा एम्ब्रॉयडर्ड शॉल।
सफेद सूती कपड़े पर लाल और काले रंग की खूबसूरत कढ़ाई से तैयार यह शॉल सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि सदियों पुरानी कला, परंपरा और पहचान की मिसाल है। इस उपहार के जरिए भारत ने अपनी लोक कला और कारीगरों की मेहनत को दुनिया के सामने सम्मान के साथ पेश किया।

टोडा समुदाय की खास पहचान है Toda Shawl
टोडा एम्ब्रॉयडर्ड शॉल दक्षिण भारत के तमिलनाडु के नीलगिरि क्षेत्र में रहने वाले टोडा समुदाय की पारंपरिक कला है। यह समुदाय लंबे समय से अपनी अलग संस्कृति और जीवनशैली के लिए जाना जाता है। शॉल सफेद सूती कपड़े पर बनाई जाती है, जिस पर लाल और काले धागों से सुंदर ज्यामितीय डिजाइन तैयार किए जाते हैं। हर शॉल हाथ से बनाई जाती है, इसलिए हर एक का डिजाइन थोड़ा अलग और खास होता है।
ये भी पढे़ं: PM Modi Seychelles Visit: UPI, स्पेस और ₹1250 करोड़ की मदद! भारत-सेशेल्स के 19 समझौतों में क्या-क्या है खास?
हाथ की कढ़ाई में छिपी सदियों पुरानी कला
इस शॉल पर की जाने वाली कढ़ाई को 'पुखूर' कहा जाता है। यह तकनीक सिर्फ टोडा समुदाय के लोगों के पास है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। इसमें किसी मशीन का इस्तेमाल नहीं होता। पूरी कढ़ाई हाथ से की जाती है, जिसमें काफी समय और मेहनत लगती है। यही वजह है कि टोडा शॉल सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि पारंपरिक कला और कारीगरी का बेहतरीन उदाहरण मानी जाती है।
परंपरा और पहचान का प्रतीक
टोडा समुदाय में इस शॉल का खास महत्व है। लोग इसे शादी, धार्मिक कार्यक्रम और दूसरे बड़े समारोहों में पहनते हैं। यह शॉल उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपरा का हिस्सा है। इसके जरिए नई पीढ़ी को भी अपनी विरासत से जोड़ने की कोशिश की जाती है। यही कारण है कि यह कला आज भी जीवित है और दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बना रही है।
ये भी पढे़ं: Modi Seychelles Visit: पीएम मोदी ने सेशेल्स की संसद में 'चटनी और समोसा' का क्यों किया जिक्र, वायरल हुआ वीडियो
भारत-सेशेल्स रिश्तों में सांस्कृतिक संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शॉल को उपहार के रूप में देकर भारत की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक हस्तकला का सम्मान दुनिया के सामने रखा। यह उपहार सिर्फ एक औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश भी है। जैसे भारत अपनी लोक कलाओं को सहेज रहा है, वैसे ही सेशेल्स भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने और आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। यही साझा सोच दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाती है।












Click it and Unblock the Notifications