पाटलिपुत्र सीट पर मुद्दे की जगह वोट बैंक हावी

Patna. Bihar
पटना। बिहार के सबसे चर्चित पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र में ऐसे तो कई चुनावी मुद्दे हैं, लेकिन इस चुनाव में मुद्दे की जगह वोट बैंक हावी नजर आ रहा है। पटना संसदीय क्षेत्र को दो हिस्सों में बंटने के बाद पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र अस्तित्व में आया। इस सीट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यादव जाति के सभी नेता इस सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं।

पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र में दानापुर, मनेर, फुलवारी, मसौढ़ी, पालीगंज तथा विक्रम विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। यह संसदीय क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र है, लेकिन शहरी मुद्दे भी यहां हावी रहते हैं।

पूर्व में मनेर विधानसभा क्षेत्र आरा संसदीय क्षेत्र का अंग था। वर्तमान समय में पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के तहत छह विधानसभा क्षेत्रों में तीन पर जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कब्जा है वहीं दो सीटों पर जनता दल (युनाइटेड) के विधायक हैं। मनेर सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक हैं।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि बिहार में मधेपुरा के बाद यह ऐसी सीट है जिस पर कब्जा करने के लिए यादव जाति के नेता लालायित रहते हैं। यही कारण है कि राजनीतिक दलों द्वारा भी यहां यादव जाति के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है।

16वीं लोकसभा चुनाव में भी राजनीतिक दलों ने यादव जाति के उम्मीदवारों पर ही विश्वास जताया है। राजद ने अध्यक्ष लालू प्रसाद की पुत्री मीसा भारती को चुनावी मैदान में उतारा है, वहीं भाजपा ने राजद से आए लालू के 'हनुमान' माने जाने वाले रामकृपाल को उम्मीदवार बनाया है जबकि बिहार के सतारूढ़ जद (यू)ने अपने पुराने सांसद रंजन प्रसाद यादव पर ही विश्वास जताते हुए चुनावी समर में उतारा है।

परिसीमन के बाद वर्ष 2009 में अस्तित्व में आए इस क्षेत्र में हुए पहले चुनाव में जद (यू) के रंजन ने बिहार के दिग्गज माने जाने वाले लालू प्रसाद को 23 हजार से ज्यादा मतों से पराजित कर बहुत कड़ा उल्टफेर किया था, परंतु इस चुनाव में रंजन के लिए इस सीट पर कब्जा बरकरार रख पाना आसान नहीं माना जा रहा है।

पानी, बिजली और सड़क इस लोकसभा क्षेत्र में सबसे अहम मुद्दे हैं। पटना से सटे इलाकों में नगरीय सुविधा की कमी है जबकि दियारा क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के लिए लोग नेताओं की ओर आस लगाए बैठे हैं। इस चुनाव में सुविधाएं और समस्याएं गौण नजर आ रही हैं। सभी दल अपने विजय के लिए जातीय गणित पर ही भरोसा जता रहे हैं।

16 लाख से ज्यादा मतदाताओं वाले इस संसदीय क्षत्र में यादव मतदाताओं की संख्या 30 प्रतिशत से ज्यादा है जबकि इतनी ही संख्या सवर्ण मतदाताओं की भी है। प्रचार पर निकली राजद उम्मीदवार मीसा कहती हैं कि उनका मुकाबला दोनों चाचा (रामकृपाल और रंजन) से है परंतु रंजन चाचा दौड़ से बाहर नजर आ रहे हैं। विकास और सामाजिक न्याय की बात करते हुए वह कहती हैं कि अब मतदाता युवा प्रत्याशी को तरजीह दे रहे हैं।

इधर, भाजपा के प्रत्याशी रामकृपाल भी नरेन्द्र मोदी के रथ पर सवार संसद तक का सफर सफलता से पूरा करने की बात कर रहे हैं। वह कहते हैं कि मोदी को सभी वर्ग के लोग देश का प्रधानमंत्री बनाना चाह रहे हैं, ऐसे में सभी लोग भाजपा को वोट करेंगे।

फिलहाल इस सीट के लिए चुनाव मैदान में उतरे सभी 20 प्रत्याशी क्षेत्र के गांव-गांव घूमकर मतदाताओं को आकर्षित करने में लगे हैं। पाटलिपुत्र सीट पर 17 अप्रैल को मतदान होना है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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