कैसे पूरा होगा स्मार्ट गांव बनाने का सपना?

पटना (मुकुंद सिंह)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 100 स्मार्ट शहर बनाने की बात कही, तो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने 100 स्मार्ट गांव बनाने की बात छेड़ दी। उनकी हां में हां मिलाई नीतीश कुमार ने। अब वक्त आ गया है इस पहल को आगे बढ़ाने का।

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Village

बिहार में सरकार का गठन हो चुका है और तेजस्वी यादव जैसे युवा के साथ मिलकर नीतीश कुमार ने बिहार की बागडोर एक बार फ़िर संभाल ली है, आवश्यकता इस बात की है कि राज्य सरकार अपने वादे को पूरा करे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि गांवों को स्मार्ट कैसे बनाया जा सकता है?

गांव शब्द आते ही पिछड़ापन दिखता है

सवाल इसलिए कि जब भी हमारे जेहन में गांव शब्द आता है, हम सुविधाविहीन परिवेश की परिकल्पना करते हैं। एक ऐसा परिवेश जिसमें हर तरह की सुविधाओं से वंचित होने के बावजूद लोगों में अपनापन और जीने के प्रति उत्साह कायम है।अब सवाल उठता है कि गांव स्मार्ट कैसे बनें।

निश्चित तौर पर गांवों में सबसे बड़ी समस्याओं में बेरोजगारी है। यह बेरोजगारी इसलिए भी है क्योंकि आजादी के 68 वर्ष बीतने के बावजूद भूमि सुधार जमीन पर लागू नहीं हो सका है। आम तौर पर जब यह सवाल उठता है तब कई समाजवादी भी इसे बिढनी का खोंता करार देकर छोड़ देते हैं। जबकि यह निर्विवाद सत्य है कि जबतक उत्पादन के संसाधनों पर वंचितों की हिस्सेदारी सुनिश्चित नहीं होगी तबतक किसी भी प्रकार का विकास अधूरा माना जाएगा।

एक कल्पना स्मार्ट गांव की

अब जरा कल्पना करिए कि गांवों में भूमि सुधार लागू हो गया है। गांव के भूमिहीन अब अपने खेत में काम करने लगे हैं। गांव के वे खेत जिनपर पहले उन लोगों का कब्जा था जो रहते तो पटना, दिल्ली या मुंबई में हैं, लेकिन गांव की जमीन परती छोड़ देते हैं। गांवों में लोगों के पास अपना रोजगार है। गांवों की उत्पादकता बढ गयी है। गांवों को शहर से जोड़ने वाली सड़क पक्की हो गयी है।

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अब शिक्षकों को भी गांवों में जाकर पढाने में कोई परेशानी नहीं होती है। शहरों में वास करने वाले चिकित्सकगण भी गांवों में बने अस्पतालों में पूरे ऐशोआराम के साथ रहते हैं और इलाज भी करते हैं।

बहरहाल यह महज कल्पना ही है। फ़िलहाल जो व्यवस्था काम कर रही है और वह जिस तरह की योजनायें चला रही हैं, उसके कारण गांवों में नौजवान केवल बेगार मजदूर बन सकते हैं या फ़िर दिल्ली, मुंबई व कोलकाता आदि शहरों में दिहाड़ी मजदूर। ऐसे में स्मार्ट गांवों का सपना पूरा करना है तो बिहार से पलायन रोकना होगा।

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