मुसलमानों के लिए फरिश्ता बनी बिहार की हिंदू विधवा
नई दिल्ली (ब्यूरो)। सारा बिहार आजकल शैल देवी का नाम ले रहा है। मसलमान तो खासतौर पर उनकी बात कर रहे हैं। उन्हें फरिश्ता बता रहे हैं। क्यों... दरअसल जब मुजफ्फरपुर जिले के सरैया थाना क्षेत्र का अजीजपुर बलियारा गांव सांप्रदायिक आग में झुलस रहा था तब एक विधवा शैल देवी ने 10 मुसलमानों की जान बचायी। बीते रविवार को पांच हजार से ज्यादा की बेकाबू भीड़ ने पड़ोसी गांव पर हमला बोल दिया था। शैल देवी इसी गांव की निवासी हैं। गांव की बहुसंख्यक आबादी मुस्लिम है।

हिन्दू युवक का कत्ल
एक हिन्दू युवक के अपहरण और फिर हत्या के बाद तनावपूर्ण माहौल था। गुस्साए हिन्दुओं ने इस गांव को निशाने पर लिया और 30 से ज्यादा घरों में आग लगा दी। शैल देवी ने कहा कि मैंने पड़ोसी मुस्लिमों को हिन्दुओं के हमले के दौरान अपने घर में शरण दी। उन्होंने कहा कि यदि मैं शरण नहीं देती तो बेकाबू भीड़ इनकी हत्या कर देती। शैल देवी ने कहा कि इनकी सुरक्षा के लिए मैं अपनी दो बेटियों के साथ घर के बाहर खड़ी थी। उन्होंने कहा, 'मैंने दंगाइयों से झूठ बोला कि मेरे घर में कोई मुसलमान नहीं है। कुछ लोगों ने मेरे घर में जबर्दस्ती जाने की कोशिश की लेकिन मैंने सख्ती से उन्हें रोका।'
शैल तो है फरिश्ता
शैल के घर में शरण लिए 60 साल के मोहम्मद ने बताया कि वह "हमलोग के लिए फरिश्ता से" कम नहीं हैं। बाद में शैल को पड़ोसियों ने धमकी भी दी थी कि उन्हें इसकी सजा देंगे।
मांझी मिले शैल से
गांव में भड़की हिंसा के दौरान दूसरे समुदाय के 10 लोगों को अपने घर में छिपाकर जान बचाने वाली बुजुर्ग महिला शैल देवी को मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बुधवार को सम्मानित किया। मांझी बुधवार को गांव पहुंचे और शैल देवी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने इस सराहनीय कार्य के लिए उन्हें सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने शैल देवी को 51,000 रुपए का चेक दिया और एक शॉल ओढ़ाकर उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने शैल देवी की दो पुत्रियों को भी मुख्यमंत्री राहत कोष से 20-20 हजार रुपए देने की घोषणा की। मांझी ने उपस्थित अधिकारियों से शैल देवी को इंदिरा आवास योजना के तहत पक्का मकान और वृद्घावस्था पेंशन योजना का लाभ देने का भी निर्देश दिया।
अजीजपुर बलियारा गांव में रविवार को अपहृत एक युवक का शव मिलने के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा में कितने लोगों की मौत हुई यह साफ नहीं है। एक मुस्लिम लड़की से प्रेम करने वाले पिछड़ी जाति के युवक का शव मिलने के बाद अजीतपुर गांव में हिंसा भड़कने के बाद लोग एक-दूसरे की जान लेने पर उतारू थे।
झोपड़ी में छिपाया
उसी वक्त गांव के ही स्वर्गीय जगलाल साहनी की पत्नी शैल देवी ने दूसरे संप्रदाय के करीब 10 लोगों को अपनी झोपड़ी में छिपाकर उनकी जान बचाई। हिंसक भीड़ उसके दरवाजे पर भी पहुंची, परंतु शैल ने सबको जगलाल का घर बताकर दरवाजे से ही लौटा दिया। जिन लोगों की शैल ने जान बचाई है, वे आज शैल को फरिश्ता से कम नहीं मानते।












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