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भारत के खिलाफ जेहादियों का इमाम है जकी उर रहमान लखवी

इस्‍लामाबाद। जकी-उर-रहमान लखवी, वह नाम जिसने वर्ष 2008 में मुंबई हमलों के साथ ही भारत में तबाही फैलाने का एक नया जरिया तलाश लिया था। यह भारत की ओर से पाक पर बनाए गए दबाव का ही नतीजा है कि फिलहाल लखवी को जेल में ही रहना होगा।

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भारत के खिलाफ जेहाद असल मकसद

भारत के खिलाफ जेहाद छेड़ना ही उसका असल मकसद है और इसी मकसद ने उसे पाकिस्‍तान में एक अहम शख्‍स के तौर पर तब्‍दील कर दिया है। लखवी को इस्‍लामाबाद की एंटी टेररिज्‍म कोर्ट ने जमानत दी, उसे हिरासत में रखा गया। उसकी अपील के बाद उसे फिर रिहा किया गया और फिर से उसे हिरासत में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

मुंबई हमलों और आतंकवाद को लेकर पाकिस्‍तान कितना गंभीर है, यह बात अब साफ हो जाती है। पाक की मंशा ही नहीं है कि वह लखवी को जेल में रखे, उस पर मुंबई आतंकी हमलों का केस चलाया जाए और उस पर दोष साबित हो सके।

पाक में लखवी को लेकर पूरे ड्रामे पर सवाल उठता है कि लश्‍कर-ए-तैयबा का भावी मुखिया होने के अलावा आखिर ऐसी क्‍ या वजह है कि लखवी पाकिस्‍तान के लिए इतना अहम है।

जेहाद के लिए जुनून

इस बात पर कोई भी शक नहीं है कि लखवी इस समय पाकिस्‍तान का ऐसा जेहादी है जिसमे जुनून की हद तक जेहाद के लिए काम करने की सोच है। कहीं पर भी अगर सबसे खतरनाक आतंकी हमले करने की बात या फिर योजना आती है तो फिर उस समय लखवी से ज्‍यादा खतरनाक और कोई नाम पाक में नहीं है।

हाफिज सईद की तरह ही लखवी भी लोगों को भारत के खिलाफ भड़काने की पूरी ताकत रखता है। लखवी योजनाएं बनाने में भले ही माहिर न हो लेकिन वह जमीनी हकीकत से वाकिफ रहने वाला शख्‍स है। उसकी इसी बात की वजह से उसे लश्‍कर में इतनी अहम जगह दी गई है।

जिस अंदाज में वह अपने साथियों को आदेश देता है और उन्‍हें भारत के खिलाफ उकसाता है, लश्‍कर के लिए वह काफी अहम है। लश्‍कर के कैडर्स उसे काफी पसंद करते हैं और वह इस बात को मानते हैं कि लखवी भारत के खिलाफ एक बड़ा युद्ध छेड़ सकता है।

जेहादियों का इमाम

पाक में लखवी को जेहादियों का इमाम माना जाता है। उसने अपने परिवार तक को युद्धभूमि में उतार दिया है और लश्‍कर इस बात के लिए उसका अहसान मानता है। लखवी के दो बेटे अबु कासिम और अबु काताल कश्‍मीर में भारतीय सेना के खिलाफ लड़ाई में मारे गए थे।

उसने उस समय अपनी पत्‍नी को कहा था कि वह इस बात से निराश न हो कि उसने अपने दोनों बेटे खो दिए। लखवी ने उन विधवाओं के लिए कैंप चलाए जिन्‍होंने कश्‍मीर में अपने पतियों को खो दिया था। यह कुछ वजहे हैं कि लखवी पाकिस्‍तान में काफी प्रतिष्ठित माना जाता है।

साफ है कि पाक ने अपनी इच्‍छा से उसे जेल में नहीं रखा है। भारत और पश्चिमी देशों की ओर से पाक पर बनाए जा रहे दबाव की वजह से उसे यह कदम उठाना पड़ा है।सच्‍चाई यह है कि उसके खिलाफ चल रहा ट्रायल आगे ही नहीं बढ़ रहा है। लखवी के केस की सुनवाई कर रहे जजों को भी उसकी सुनवाई से डर लगने लगा है।

लखवी के जेल से बाहर न आने की वजह से लश्‍कर के कैडस में खासी निराशा है। वह लखवी की कमी महसूस करते हैं और हो सकता है कि लश्‍कर में इस बात को लेकर अंदर ही अंदर फूट पड़ जाए।

अगर ऐसा हुआ तो पाक के लिए बहुत ही अनियंत्रित स्थिति हो जाएगी। लश्‍कर आईएसआई और पाक के लिए काफी भरोसेमंद है और उसके साथ अपने संबंधों पर पाक कभी आंच नहीं आने देगा।

भारत के खिलाफ लखवी

भारत के खिलाफ लखवी के कुछ बयान इस बात का साफ संकेत हैं कि लखवी को पाक में क्‍यों इतना प्‍यार दिया जाता है। लखवी पहले ही कह चुका है कि उसका प्राइमरी एजेंडा भारत को तबाह करना है। साथ ही उसने इस बात को भी कई बार जोर देकर कहा है कि भारत में लश्‍कर के नेटवर्क को और मजबूत किया जाएगा और इसका विस्‍तार किया जाएगा।

कारगिल युद्ध से पहले भी उसने अपने कैडर्स को भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की बात कही थी। उसने कहा था कि अब समय आ गया है जब भारत को तोड़ दिया जाए।

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