तो यह है हाफिज सर्इद के ट्विटर अकाउंट सस्पेंड होने की वजह
लाहौर। सोमवार को जैसे ही खबर आई कि लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख और भारत में मुंबई हमलों के मास्टर माइंड हाफिज सईद का ट्विटर अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया है, मानों जैसे हंगामा ही मच गया। लेकिन कुछ ही देर बाद सईद फिर से ट्विटर पर वापस आ गया।

पाकिस्तान में आजाद घूमने वाले सईद के लिए ट्विटर एक ऐसा जरिया है जो उसके प्रपोगेंडा को भारत के साथ ही साथ दुनिया के बाकी देशों तक पहुंचाने में काफी मदद करता है। ऐसे में जो लोग इस बात को लेकर खुश थे कि अब सईद ट्विटर पर नहीं आएगा, उनकी खुशी थोड़ी ही देर में काफूर हो गई।
क्या हुआ था सोमवार को
हाफिज सईद के ट्विटर अकाउंट पर भारतीय एजेंसियां पिछले कुछ समय से नजर बनाए हुए थीं। शुक्रवार को हुए हमले के बाद इस बात के भी सुबूत मिले कि सईद भारत के खिलाफ ट्विटर के जरिए बहुत आग उगल रहा है।
एजेंसियों को इस में जो सबसे बड़ी समस्या नजर आ रही थी, वह थी कि उसकी ट्वीट युवाओं को काफी आकर्षित करती थीं। मीडिया के साथ ही साथ भारतीय संस्थानों को भी इस बात को लेकर बड़ी चिंता थी।
उन्होंने ट्विटर से संपर्क किया और बस फिर क्या था ट्विटर ने भी कड़ी कार्रवाई करते हुए सईद का ट्विटर अकाउंट सस्पेंड कर डाला।
आतंकी क्यों प्रयोग करते हैं सोशल मीडिया
आतंकी वर्तमान समय में पढ़े-लिखे लोगों को ज्यादा से ज्यादा आकर्षित करने की कोशिशों में लगे हैं। उनके लिए ट्विटर एक सही जरिया साबित हुआ है और वह इसे एक ऐसा प्लेटफॉर्म मानते हैं कि जो ज्यादा से ज्यादा युवाओं को उनका संदेश दे सकता है।
ग्लोबल स्टैटिस्टिक्स की मानें तो आतंकियों की ओर से 100 लोगों की भर्ती में होती है तो 70 लोग ऐसे होते हैं जिनकी भर्ती ऑनलाइन होती है। सोशल मीडिया पर इन संगठनों की ओर से पोस्ट किए गए वीडियो और साहित्य की वजह से ऑनलाइन रिक्रूटमेंट आतंकियों का सबसे पसंदीदा प्लेटफॉर्म बन गया है।
भले ही सईद अल कायदा और आईएसआईएस की तुलना में इंटरनेट को बहुत ज्यादा निर्दयता परोसने के लिए नहीं प्रयोग करता है लेकिन फिर भी उसके संदेश युवाओं को काफी आकर्षित करते हैं।
सईद की ओर से ट्वीट काफी तेज आती हैं और ज्यादातर ट्वीट्स भारत को ध्यान में रखकर की जाती हैं। एजेंसियों को लगने लगा था कि वह हाथ से बाहर जा रहा है।
फायदे और नुकसान
आतंकियों के सोशल मीडिया को प्रयोग करने के अगर नुकसान भी हैं तो उसके कुछ फायदे भी हैं। नुकसान की अगर बात करें तो आतंकी कभी भी सोशल मीडिया के जरिए कोई भी ऐसी बात नहीं कहेंगे जो जेहाद से जुड़ी हो।
ऐसे में जिन लोगों को लगता है कि किसी आतंकी या फिर आतंकी संगठन के ट्विटर हैंडल को फॉलो कर उन्हें कोई जानकारी मिल सकती है, तो वह पूरी तरह से गलत हैं।
वहीं कभी-कभी इंटलीजेंस एजेंसियों के लिए यह अकाउंट फायदे की वजह बन जाते हैं क्योंकि इसके जरिए वह किसी भी आतंकी या फिर संगठन की मानसिकता को भांप सकते हैं। यह अकाउंट एजेंसियों को इस बात का संकेत भी दे सकते हैं कि आतंकियों का अगला कदम क्या होने वाला है।
ऐसे में इन अकाउंट को सस्पेंड करने का मतलब बड़ी संख्या में जानकारियों से नाता टूटना है।
हालांकि कभी आतंकी सोशल मीडिया पर प्लान के बारे में कुछ नहीं बताएंगे लेकिन इस बात की जानकारी तो मिल ही सकती है कि वह किस तरह से काम कर रहे हैं।












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