पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों पर क्यों हो रहा है जुल्म, 75 कब्रें और 2 धार्मिक स्थल किए गए ध्वस्त
Ahmadiyya in Pakistan: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पुलिस ने अहमदी अल्पसंख्यक मुसलमानों की 75 कब्रों और दो धार्मिक स्थलों को ध्वस्त कर दिया। अहमदी अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने रविवार 24 सितंबर को इसकी जानकारी मीडिया को दी।
जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान के पदाधिकारी आमिर महमूद ने कहा कि, 'तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के दबाव में आकर पंजाब पुलिस ने सियालकोट जिले के दस्का शहर में हमारे मकबरों के पत्थरों को ध्वस्त कर दिया। इतना ही नहीं अहमदियों की 74 कब्रों को भी तोड़ा गया है।

पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों पर हो रहे जुल्म और अत्याचार के मामले अक्सर देखने को मिल जाते हैं। इस समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है कि पाकिस्तान में उनका रहना मुश्किल हो गया है। सितंबर के महीने में ही दो अलग-अलग घटनाओं के तहत पंजाब के शेखपुरा और नारंग मंडी इलाके में अहमदियों के धार्मिक स्थलों की मिनारों को टीएलपी और पुलिस ने तोड़ दिया था।
पाकिस्तान में अहमदियों के उत्पीड़न का लंबा है इतिहास!
पाकिस्तान में अहमदी अल्पसंख्यक मुसलमानों के शोषण और उत्पीड़न का एक लंबा इतिहास रहा है। 1889 में अहमदिया समुदाय की स्थापना पाकिस्तान के कादियान नाम के एक गांव में हुई थी। ये गांव अब भारत के पंजाब में है। अहमदिया मुसलमान और सुन्नी-शिया मुसलमान के मान्याताओं में अंतर है...इससलिए कई मुसलमान अहमदिया मुसलमान को विधर्मी मानते हैं।
पाकिस्तान में फिलहाल लगभग 40 लाख अहमदिया मुसलमान रहते हैं। लेकिन अक्सर उनकी संपत्ति, इबादत स्थलों और जान पर हमला होने की खबरें आती रहती हैं। पाकिस्तान के अहमदियों का कहना है कि कानूनों के तहत उनका उत्पीड़न हो रहा है। पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों को अपना धर्म का प्रचार करने, इकट्ठा होकर अजान करने भी रोक है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमान कुरान की आयतों को सोशल मीडिया पर शेयर भी नहीं कर सकते हैं। कब्र की पत्थरों पर कलमा लिखने पर भी उनको सजा हो सकती है।

अहमदिया मुसलमानों को भारत क्यों लगता है पाकिस्तान से ज्यादा सुरक्षित!
पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों पर बहुत अत्याचार किया गया है और उन्हें गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया गया। अहमदिया मुसलमानों का मानना है कि भारत में अल्पसंख्यक मुसलमानों पाकिस्तान से ज्यादा सुरक्षित हैं। जब भी अहमदिया मुसलमान भारत की धार्मिक यात्रा पर आते हैं तो वह मस्जिदों में और खुले में नमाज अदा करते हैं।
कई मौकों पर भारत की धार्मिक यात्रा पर आए अहमदिया मुसलमान ने कहा है कि भारत के पसमांदा मुस्लिम यहां बहुत सुरक्षित हैं और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जाता है। बता दें कि पसमांदा, भारत में मुस्लिमों का ओबीसी ग्रुप है।
भारत में रहने वाले मुस्लिमों में 15 फीसदी उच्च वर्ग के हैं और 85 प्रतिशत बैकवर्ड माने जाते हैं, जिन्हें पसमांदा मुस्लिम कहा जाता है। लेकिन भारत में भारत में पसमांदा मुस्लिमों के साथ सरकार की ओर से कोई भेदभाव या उनकी धार्मिक आजादी पर कोई पाबंदी नहीं है। कई मौकों पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पसमांदा मुस्लिमों पर ध्यान देने की बात पर जोर दिया है।












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