भारत पर कसूरी की नीयत को लेकर हमेशा शक करते थे परवेज मुशर्रफ
इस्लामाबाद। खुर्शीद महमूद कसूरी, पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री इस समय भारत में अपनी किताब, 'नाइदर ए हॉक नॉर ए डव,' की लांचिंग के लिए मौजूद हैं। कसूरी पूर्व राष्ट्रपति और पाक सेनाध्यक्ष जनरल परवेज मुशर्रफ के कार्यकाल में पाक के विदेश मंत्री थे।शायद एक ऐसे मंत्री थे जो राष्ट्रपति के करीब होने के बावजूद अक्सर शक के दायरे में रहते थे। कसूरी ने अपनी किताब में भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूद रिश्तों के बारे में बताया है।
'क्या रहेगी भारत के खिलाफ आपकी नीति'
कसूरी पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में थे और यहां पर उन्होंने इस बारे में मुशर्रफ की सोच के बारे में मीडिया से बात की। उन्होंने भारतीय मीडिया को बताया कि जब उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया तो मुशर्रफ ने पूछा था, 'भारत के खिलाफ आपकी नीति क्या रहेगी, एक बाज की या फिर एक कबूतर की।' कसूरी ने बताया कि इस वजह से ही उन्होंने अपनी किताब का नाम, 'नाइदर ए हॉक नॉर ए डव,' रखा।
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परवेज मुशर्रफ को अक्सर कश्मीर पर उनकी नीति और उनकी सोच को लेकर शक रहता था क्योंकि शायद वह कभी नहीं चाहते थे कसूरी की नीति शांति का रास्ता साफ करे।
भारत और कसूरी का रिश्ता
- खुर्शीद महमूद कसूरी वर्ष 2002 में पहली बार पाकिस्तान के विदेश मंत्री बने थे।
- वह वर्ष 2007 तक विदेश मंत्री रहे और पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के करीबी माने जाते हैं।
- माना जाता है कि उनके कार्यकाल में कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान ने प्रगति की थी।
- कश्मीर को लेकर कसूरी की नीति काफी नाजुक थी।
- वह अक्सर इस मुद्दे की वजह से दोनों देशों के बीच टकराव के खिलाफ थे।
- लेकिन वह कभी भी एक ऐसे राजनेता के तौर पर आगे नहीं बढ़ना चाहते थे जो कश्मीर पर अलग राय रखता हो।
- वह भारत और पाक के लोगों के बीच बातचीत को लेकर एक अलग नजरिया रखते थे।
- वह इस बात पर भी यकीन करते थे कि कश्मीर पर पाक की मौजूदा नीति कश्मीरियों के हितों के पक्ष में नहीं है।
- वह बड़ी बेबाकी से इस बात को मानते थे कि पाक को भारत के लिए अपनी नीतियों को सुधारना होगा।
एक राजनेता के तौर पर कसूरी
- वर्तमान में कसूरी पाक स्थित रीजनल पीस इंस्टीट्यूट के चेयरमैन है।
- पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी इमरान खान की पीटीआई पार्टी का हिस्सा।
- इस पार्टी में कश्मीर के लिए बनी टास्ट फोर्स के चेयरमैन और पार्टी की कोर कमेटी के सदस्य हैं।
- कसूरी वर्ष 1980 में पाक की राजनीति का हिस्सा बने थे।
- 1990 में कसूरी विदेश मंत्रालय में शामिल हुए उस समय उनका काम विदेश नीति से जुड़े मुद्दों को निर्देशित करना था।
- वर्ष 1998 में परमाणु परीक्षण के समय पीएम नवाज शरीफ की नीति को दुनिया भर में प्रचारित किया।
- समर्थन जुटाने के लिए उन्होंने रूस, चीन, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों का दौरा किया।













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