Mamata Banerjee Protest: कोलकाता में ममता बनर्जी का महाधरना, TMC नेताओं पर हमलों के खिलाफ सड़क पर उतरीं दीदी
Mamata Banerjee Protest: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से भारी उबाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंगलवार 2 जून 2026 को कोलकाता के ऐतिहासिक रानी रश्मोनी रोड पर एक दिवसीय बड़े विरोध प्रदर्शन और धरने का नेतृत्व करने सड़क पर उतरी। यह धरना अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी समेत टीएमसी नेताओं व कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमलों और रेलवे द्वारा चलाए जा रहे हॉकर बेदखली अभियान के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है।
इस बीच, कोलकाता पुलिस द्वारा इस धरने को अनुमति देने से इनकार किए जाने के बावजूद ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वे पीछे नहीं हटेंगी।

सोमवार को एक तीखे बयान में उन्होंने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि अगर उन्हें कोलकाता में प्रदर्शन नहीं करने दिया गया, तो वे अकेले ही दिल्ली जाकर संसद के सामने धरना देंगी। इसके साथ ही उन्होंने अपनी ही पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और भाजपा के 'प्रेशर टैक्टिक्स' को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा भी किया है।
पार्टी नेताओं पर हमलों के विरोध में धरना
टीएमसी का दावा है कि हाल के दिनों में पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमले हुए हैं। पार्टी का आरोप है कि राजनीतिक विरोधियों द्वारा डर और दबाव का माहौल बनाया जा रहा है। इसी के विरोध में कोलकाता के रानी रश्मोनी एवेन्यू में एक दिवसीय महाधरने का आयोजन किया गया।
धरने के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करती रहेगी और किसी भी दबाव के आगे झुकेगी नहीं। उन्होंने कहा कि टीएमसी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह आंदोलन जारी रहेगा।
अभिषेक बनर्जी को हटाने का दबाव: ममता ने खोले अंदरूनी राजनीति के राज
धरने के दौरान ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को कमजोर करने और संगठन में भ्रम पैदा करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन टीएमसी एकजुट है और किसी भी तरह के दबाव में फैसले नहीं लिए जाएंगे। इससे पहले सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी ममता ने कहा- TMC छोड़कर गए कुछ बड़े नेता दोबारा घर वापसी (पार्टी में लौटने) के लिए तैयार हैं, बशर्ते उनके भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को पार्टी के नेतृत्व पद से हटा दिया जाए।
इस 'दबाव की राजनीति' को सिरे से खारिज करते हुए ममता बनर्जी ने कहा-"मैं किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग या दबाव की रणनीति के आगे झुकने वाली नहीं हूं। टीएमसी अपने सिद्धांतों और नेतृत्व पर अडिग रहेगी। कुछ लोग भाजपा के इशारे पर मेरी पार्टी को कमजोर करने और दलबदल (Defections) कराने के लिए पैसे और ताकत का नंगा नाच कर रहे हैं, लेकिन वे अपने मंसूबों में कभी कामयाब नहीं होंगे।"
बिना अनुमति के भी जारी रहेगा धरना; हॉकरों की बेदखली पर केंद्र को घेरा
कोलकाता पुलिस द्वारा सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देकर धरने की अनुमति न दिए जाने पर मुख्यमंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ किया कि टीएमसी का यह शांतिपूर्ण धरना हर हाल में रानी रश्मोनी रोड पर आयोजित होकर रहेगा।
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि रेलवे द्वारा बिना किसी उचित पुनर्वास योजना (Rehabilitation Plan) के गरीब हॉकरों और छोटे व्यापारियों को उनके रोजगार से बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज बंगाल के आम लोग और छोटे व्यापारी भाजपा के दमनकारी रवैये के कारण डर के साए में जीने को मजबूर हैं। टीएमसी इन गरीब हॉकरों के हक की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ेगी।
दिल्ली तक गूंजेगी इस धरने की गूंज
आज कोलकाता की सड़कों पर होने वाला यह महाधरना केवल कानून-व्यवस्था या हॉकरों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आगामी राजनीतिक लड़ाई के लिए ममता बनर्जी की शक्ति प्रदर्शन की तैयारी भी है। अगर कोलकाता में राज्य प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव बढ़ता है, तो ममता बनर्जी का 'दिल्ली कूच' का अल्टीमेटम राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष को एकजुट करने का एक नया हथियार बन सकता है।













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