तालिबान ने की है अमजद साबरी की हत्या, कव्वाली गाने से खफा था तालिबान
कराची। कव्वाल और सूफियाना संगीत के बड़े नाम अमजद साबरी की हत्या पर पाकिस्तान में अभी तक किसी को यकीन नहीं हो रहा है। साबरी की बुधवार को सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या पर कलाकारों काफी गुस्से में हैं और प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है। उनकी हत्या की जिम्मेदारी तालिबान ने ली है।

इसलिए मार डाला तालिबान ने
बीबीसी की रिपोर्ट पर अगर यकीन करें तो उन्हें सिर्फ इसलिए मार डाला गया क्योंकि वह कव्वाली गाते थे। तालिबान का मानना है कि साबरी सूफी संगीत को कव्वाली के तौर पर प्रयोग करके खुदा की बेइज्जती कर रहे थे।
वह शादियों में कव्वाली गाते थे और इस वजह से तालिबान ने उन्हें मार डालना बेहतर समझा। 45 साल के गायक और उनके एक सहयोगी कराची के भीड़भाड़ वाले लियाकतबाद 10 इलाके में कार से कहीं जा रहे थे।
अब क्या करेंगे जनरल शरीफ
उसी समय तभी मोटरसाइकिल सवार बंदूकधारियों ने उनकी कार फायरिंग करनी शुरू कर दी। रेंजर्स ने साबरी के घर के बाहर के सीसीटीवी को कब्जे में ले लिया है। इस पूरे घटनाक्रम की तेजी से जांच की जा रही है।
अमजद साबरी के भाई सरवत साबरी ने कहा कि ऐसे दरिंदे मौत मांगें तो उन्हें मौत भी ना मिले। जनरल राहील शरीफ पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। अब उन्हें एक्शन लेना होगा।
पाक के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने हमले की निंदा करते हुए अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
कव्वाली के रॉकस्टार
प्रसिद्ध कव्वाल गुलाम फरीद साबरी के बेटे अमजद साबरी का परिवार सूफी कला और सूफी कविता के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए पूरे उपमहाद्वीप में मशहूर है।
साबरी की सबसे प्रसिद्ध और यादगार कव्वालियों में 'भर दो झोली', 'ताजदार-ए-हरम' और 'मेरा कोई नहीं है तेरे सिवा' शामिल हैं।
साबरी ने यूरोप और अमेरिका में कई कार्यक्रम प्रस्तुत किए थे। उन्हें गायिकी की आधुनिक शैली के लिए कव्वाली का 'रॉकस्टार' कहा जाता था।












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