पेशावर जैसे आतंकी डर से निबटने के लिए टीचरों ने उठाई बंदूकें
पेशावर। कभी जिन हाथों में अक्सर कलम, डस्टर और चॉक नजर आती थी, अब उन्हीं हाथों में बंदूकें नजर आने लगी हैं। स्कूलों में बच्चों को हैंडराइटिंग सुधारने वाले अब खुद सीख रहे हैं कि अगर दुश्मन सामने हो तो किस तरह से फायरिंग की जाए कि दुश्मन वहीं ढेर हो जाए। जीं हां, पाकिस्तान में 17 दिसंबर को पेशावर के स्कूल पर हुए आतंकी हमले के बाद अब खैबर पख्तूनख्वा के स्कूलों में टीचरों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाने लगी है।

टीचरों ने उठाए हथियार
न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के मुताबिक पाकिस्तान के उत्तर पश्चिमी प्रांत में स्थित खैबर पख्तूनवा इलाके में स्थित सभी स्कूलों को आदेश जारी कर दिए गए हैं कि वे हर टीचर चाहे वह पुरुष हो या फिर महिला, उसे हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे। यह आदेश स्कूलों की तरफ से पेशावर जैसे आतंकी हमले को दोबारा न होने देने के इरादे से उठाया गया है।
टीचरों को दिए गए लाइसेंस
खैबर पख्तूनख्वा के सूचना मंत्री मुश्ताक गनी ने कहा कि 35,000 सरकारी स्कूलों को हमले से बचाने के लिए धन नहीं है। इसलिए खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने स्कूली शिक्षकों को लाइसेंस वाले बंदूक रखने की मंजूरी दे दी है।
पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए हमले में करीब 145 लोगों की मौत हो गई थी जिसमें 132 बच्चे शामिल थे। इस हमले के बाद पाक में आतंकवाद और आतंकियों के खिलाफ कड़ी नीतियों की मांग उठने लगी थी। इस हमले ने पूरे पाकिस्तान को झकझोर कर रख दिया था।
हालांकि पाक में इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है कि क्या टीचर्स को हथियारों की ट्रेनिंग देना सही रहेगा। कुछ लोगों को इस बात पर शक है कि शायद टीचर प्रभावशाली तरीके से तालिबान के आंतकियों का सामना कर सकेंगे।
बढ़ाई गई स्कूलों की सुरक्षा
खैबर के स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर दिया गया है। ज्यादा से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। स्कूलों में कंटीले तारों की घेराबंदी को तो बढ़ा ही गया है साथ ही साथ सीसीटीवी कैमरे भी इंस्टॉल कर दिए गए हैं।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल अधिकारी हालांकि, उन्हें आतंकवादियों से मिली धमकी पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन प्रधानाध्यापकों को खाली ताबूत भेजे जाने की खबरें सामने आ रही हैं, जो आगे आने वाले खतरे के संकेत लग रहे हैं।












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