बलूचिस्‍तान के इस मंदिर में रावण वध के बाद देवी के दर्शन के लिए पहुंचे थे भगवान श्रीराम!

कराची। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत 17 अक्‍टूबर से हो गई है। जहां भारत में तो इस पर्व की धूम है ही, पड़ोसी मुल्‍क पाकिस्‍तान में भी इस पर्व पर मंदिरों में रौनक देखी जा सकती है। पाकिस्‍तान के बलूचिस्‍तान प्रांत में स्थित हिंगलाज मंदिर की जो तस्‍वीरें सामने आई हैं, वो ये बताने के लिए काफी हैं कि कैसे यहां पर लोग इस उत्‍सव का आनंद उठा रहे हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन दशहरे के साथ होता है। बलूचिस्‍तान में इन दिनों काफी उथल-पुथल मची हुई है और लोग सेना के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं।

21 शक्ति पीठ में एक

21 शक्ति पीठ में एक

हिंगलाज मंदिर को नानी मंदिर के तौर पर भी जानते हैं। बलूचिस्‍तान में स्थित यह मंदिर 21 शक्ति पीठों में से एक है। भारत में जो महत्‍ता वैष्‍णो देवी धाम की है, वही स्‍थान बलूचिस्‍तान में इस मंदिर का है। हिंगलाज मंदिर भी पहाड़ पर स्थित है और हिंगोल नदी के किनारे पर स्थित है। इस मंदिर में हर वर्ष नवरात्रि के मौके पर काफी धूम-धाम देखी जा सकती है। हर वर्ष यहां पर श्रद्धालुओं की तरफ से नौ दिनों तक भंडारे और फलहार का आयोजन भी किया जाता है। हर वर्ष यहां हिंगलाज यात्रा का आयोजन होता है। हिंगलाज यात्रा के दौरान प्रतिवर्ष 250,000 हिंदु श्रद्धालु हिस्‍सा लेते हैं।

मुसलमान समुदाय कहता नानी की हज

मुसलमान समुदाय कहता नानी की हज

कहते हैं कि भगवान श्रीराम के पावन कदम हिंगलाज माता के मंदिर में भी पड़े थे। अध्‍यात्‍म के विषयों के जानकारों की मानें तो जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया तो उसके बाद वह इस मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। नवरात्रि के दौरान यहां पर हिंदू सिंधी श्रद्धालुओं की भीड़ तो रहती ही है साथ में मुसलमान धर्म के लोग भी मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं। स्‍थानीय मुसलमान समुदाय के लोगों ने हिंदुओं के साथ मिलकर हिंगलाज माता श्राइन को तीर्थस्‍थान बनाने में योगदान दिया है। कई लोग इसे तीर्थस्‍थल को 'नानी की हज' भी कहते हैं।

भारत से भी पहुंचते हैं यात्री

भारत से भी पहुंचते हैं यात्री

पाकिस्‍तान में दो और शक्ति पीठ हैं और इनमें से एक कराविपुर है जो कराची में है। इसे शंकराचार्य पीठ के नाम से भी जानते हैं। दूसरा शक्ति पीठ शारदा पीठ है जो लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर स्थित है। भारत से हर साल हजारों की संख्‍या में श्रद्धालु इन श्राइन के दर्शन करने के लिए जाते हैं। भारत के जोधपुर से पाकिस्‍तान के कराची तक जाने वाली थार एक्‍सप्रेस के जरिए श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए जाते थे। लेकिन पिछले वर्ष अगस्‍त में आर्टिकल 370 हटने के बाद भारत और पाक के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर इस ट्रेन को कैंसिल कर दिया गया। अब अगले आदेश तक यह ट्रेन कैंसिल रहेगी और तब तक श्रद्धालुओं को मन मसोस कर रहना पड़ेगा।

कराची में भी नवरात्रि का उत्‍सव

कराची में भी नवरात्रि का उत्‍सव

कराची में कोरोना वायरस महामारी की वजह से सभी धर्मस्‍थलों को बंद कर दिया गया है। इसकी वजह से वहां पर रहने वाले श्रद्धालु दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। कराची के नारायणपुरा में हिंदुओं की संख्‍या काफी ज्‍यादा है। यहां पर नवरात्रि की अलग ही धूम है। कराची के जोग माया मंदिर में नौ दिनों तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। मंदिर को देवी शेरावाली के मंदिर के तौर पर जाना जाता है। यहां पर दशमी पर प्रार्थना करने के बाद श्रद्धालु लक्ष्‍मीनारायण मंदिर में इकट्ठा होते हैं और मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।

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