ये जो 'जाहिल' पाकिस्तान में हुआ क्या हिंदुस्तान में हो पाएगा?
पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनवा प्रान्त के शिक्षा मंत्रालय ने सरकारी स्कूलों में दाखिलों का लेखा-जोखा बताती रिपोर्ट जारी की है।
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान में अक्सर कई मामलों को लेकर तुलना की जाती है। बहुत सारी चीजों के बारे में कहा जाता है कि हम कभी पाकिस्तान की तरह से ना हों तो बेहतर है लेकिन पाक में एक ऐसा काम हुआ है जिसे हर कोई चाहेगा कि भारत में भी हो जाए। मामला बच्चों की शिक्षा ये जुड़ा है।


खैबर-पख्तूनवा में शिक्षा विभाग का कमाल
पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनवा प्रान्त के शिक्षा मंत्रालय ने सरकारी स्कूलों में दाखिलों का लेखा-जोखा बताती रिपोर्ट जारी की है। ये रिपोर्ट पिछले दो साल की है। इस रिपोर्ट में सबसे खास बीते दो साल में प्राइवेट स्कूल छोड़ सरकारी स्कूल में आने वाले बच्चों की संख्या है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक लाख चार हजार बच्चे प्राइवेट से सरकारी स्कूलों में दाखिल हुए हैं।

78 हजार लड़के, 28 हजार लड़कियां
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 34 हजार तो इस साल 71 हजार छात्र प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिल हुए। इन बच्चों में 78 हजार छात्र जबकि 28 हजार छात्राएं हैं। सबसे ज्यादा प्राइवेट से सरकारी स्कूलों की तरफ जिन जिलों के बच्चे आए हैं उनमें जिला हरिपुर, डेरा-इस्माइल खान, मर्दान और स्वात है।

शिक्षा मंत्री का तारीफ
रिपोर्ट के मुताबिक, प्राइवेट स्कूलों से बच्चे सरकारी स्कूलों की तरफ आए ही हैं दाखिलों की तादाद में रिकॉर्ड इजाफा बीते दो सालों में हुआ है। खैबर-पख्तूनवा प्रान्त के शिक्षा मंत्री आतिफ खान को भी इस रिपोर्ट के लिए बधाईयां मिल रही हैं। पकिस्तान तहरीके-इंसाफ के मुखिया इमरान खान ने आतिफ को इस रिपोर्ट पर बधाई दी है। खैबर-पख्तूनवा में तहरीके-इंसाफ की ही सरकार है।

भारत में चुनौती रहा है सरकारी स्कूलों का हाल सुधारना
भारत में सरकारी स्कूलों की हालत काफी खराब है। माना जाता रहा है कि जिनके पास साधन नहीं हैं वही बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजते हैं। कई दफा कोर्ट भी सरकारी स्कूलों की हालत पर टिप्पणी कर चुका है। ऐसे में कहा जा रहा है कि जब पिछड़े कहे जाने वाले पाकिस्तान में सरकारी स्कूल सुधर सकते हैं तो फिर भारत में क्यों नहीं।












Click it and Unblock the Notifications