कटासराज मंदिर: जानिए पाकिस्‍तान की उस जगह के बारे में जिसे कहते हैं 'शिव नेत्र'

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    इस्‍लामाबाद। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि करतारपुर कॉरिडोर के बाद वह यहां पर स्थित हिंदूओं के लिए महत्‍वपूर्ण धार्मिक स्‍थलों को खोलने पर विचार कर रहे हैं। भारतीय मीडिया से बातचीत करते हुए इमरान ने अपने बयान में पीओके में स्थित शारदा पीठ और पंजाब प्रांत में स्थि‍त कटासराज मंदिर का जिक्र किया। कटासराज, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है और यह भगवान शिव का प्रचीन मंदिर है। इस मंदिर का जिक्र महाभारत काल में भी मिलता है। इस मंदिर को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र करार दिया जाता है। यह भी पढ़ें-जानिए हिंदुओं के लिए क्या है पा‍िकिस्‍तान में स्थित शारदा पीठ का महत्व

    यहां पर गिरे थे शिव के आंसू

    यहां पर गिरे थे शिव के आंसू

    कटासराज मंदिर पंजाब प्रांत के उत्‍तर में स्थित नमककोह की पहाड़‍ियों में स्थित है और हिंदुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। यहां एक प्राचीन शिव मंदिर के अलावा कुछ और भी मंदिर हैं। कहते हैं कि ये सभी मंदिर 10वीं सदी के हैं। इतिहासकारों एवं पुरात्तव विभाग के अनुसार, इस जगह को शिव नेत्र माना जाता है। इतिहासकारों के मुताबिक जब मता पार्वती सती हुई तो भगवान शिव की आंखों से दो आंसू टपके थे। मान्‍यताओं के मुताबिक एक आंसू कटास पर टपका जहां अमृत बन गया। यह आज भी महान सरोवर अमृत कुंड तीर्थ स्थान कटासराज के रूप में है। बताया जाता है कि दूसरा आंसू राजस्थान के अजमेर में और पुष्‍कर में टपका था।

    क्‍या है महाभारत से इसका रिश्‍ता

    क्‍या है महाभारत से इसका रिश्‍ता

    यह कहानी भी है कि महाभारत में पांडव वनवास के दिनों में इन्ही पहाड़ियों में अज्ञातवास में रहे थे। जब पांडव अज्ञातवास के रास्‍ते पर थे तो उन्‍हें प्यास लगी और वे पानी की खोज में यहां तक पहुंचे थे। इस कुण्ड पर यक्ष का अधिकार था। सबसे पहले नकुल पानी लेने गए और जब वह पानी पीने लगे तो यक्ष ने आवाज दी की। उन्‍होंने कहा कि पानी पर उनका अधिकार है और वह इसे पीने की कोशिश न करें। यक्ष ने नकुल से का कि अगर उन्हें पानी लेना है तो फिर पहले उनके प्रश्नों का उत्तर देना होगा। नकुल सही जवाब नहीं दे सके और और पानी पीने लगा। यक्ष ने उन्‍हें बेहोश कर दिया।

    युधिष्ठिर ने यहीं पर दिए यक्ष को सही जवाब

    युधिष्ठिर ने यहीं पर दिए यक्ष को सही जवाब

    ठीक इसी तरह से सहदेव, अर्जुन और भीम एक-एक करके पानी लेने गये। कोई भी यक्ष के सवालों का जवाब नहीं दे सका और गलत जवाब के बाद भी उन्‍होंने पानी लेने की कोशिशें की। यक्ष ने चारों भाइयों को बेहोश कर दिया। आखिरी में अंत में चारों भाइयों को खोजते हुए सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर, कुंड के करीब पहुंचे और उन्‍होंने अपने भाईयों को बेहोश देखकर पूछा कि इन्‍हें जिसने भ्‍री बेहोश किया है वह सामने आए। यक्ष प्रकट हुए और उन्‍होंने कहा चारों भाईयों ने बिना उनके सवालों का जवाब दिए पानी पीने की कोशिश की और उनका यह हाल हुआ। यक्ष ने कहा कि अगर युधिष्ठिर ने भी ऐसा किया तो फिर उन्‍हें भी बेहोश कर दिया जाएगा। इस पर युधिष्ठिर यक्ष के सवालों का जवाब देने को राजी हुए। युधिष्ठिर के हर सवाल का सही जवाब दिया और यक्ष ने प्रसन्न होकर पांडवों को जीवित कर दिया। इसके बाद पांडव अपनी जगह को चले गए।

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