पाकिस्तानी सेना प्रमुख से राष्ट्रपति तक, कैसे रहा परवेज मुशर्रफ का सफरनामा, कारगिल युद्ध की रची थी साजिश
Pervez Musharraf Death: पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का दुबई के अस्पताल में निधन हो गया है। वह 79 वर्ष के थे। परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति और सेना प्रमुख रह चुके हैं।

Pervez Musharraf: पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का रविवार (05 फरवरी 2022) को 79 साल की उम्र में निधन हो गया। उनका काफी समय से दुबई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। परवेज मुशर्रफ ने अपनी आखिरी सांस भी दुबई के अस्पताल में ही ली। पाकिस्तान जियो न्यूज के मुताबिक पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ (सेवानिवृत्त) का लंबी बीमारी के बाद दुबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। 1999 के कारगिल युद्ध के सूत्रधार रहे परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ को अपदस्थ कर पाकिस्तान के मुख्य कार्यकारी का पद संभाला था। 2001 में उन्होंने खुद को राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया और 2008 तक शासन किया था। आइए जानें परवेज मुशर्रफ के बारे में?

दिल्ली में हुआ था परवेज मुशर्रफ का जन्म, बटंवारे के बाद गए कराची
परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति और सेना प्रमुख रह चुके हैं। साल 1999 में नवाज शरीफ की लोकतांत्रिक सरकार का तख्ता पलट कर उन्होंने खुद को पाकिस्तान का राष्ट्रपति घोषित किया था। परवेज मुशर्रफ का पाकिस्तान के राष्ट्रपति का कार्यकाल 20 जून 2001 से 18 अगस्त 2008 तल चला। परवेज मुशर्रफ का जन्म 11 अगस्त 1943 को दिल्ली के दरियागंज में हुआ था। भारत की आजादी और बंटवारे के बाद परवेज मुशर्रफ परिवार के साथ दिल्ली से कराची चले गए थे।

1964 में हुए पाकिस्तानी सेना में शामिल
परवेज मुशर्रफ 1964 में पाकिस्तानी सेना में शामिल हुए और क्वेटा में आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज से स्नातक की उपाधि ली। इसके बाद वह लंदन में रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में हिस्सा लिया था। 1998 में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने परवेज मुशर्रफ को पाकिस्तानी सेना प्रमुख नियुक्त किया था। फोर-स्टार जनरल के रूप में उनका पाकिस्तानी सेना प्रमुख नियुक्त किया जाना, बिना विवादों के नहीं था। उनकी पदोन्नति ने उनसे वरिष्ठ दो अधिकारियों को पछाड़ दिया था।

कारगिल युद्ध के दौरान मुशर्रफ ही थे पाकिस्तान के सेना-प्रमुख
अप्रैल से जून 1999 तक भारत और पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध के दौरान परवेज मुशर्रफ ही पाकिस्तान के सेना-प्रमुख थे। मुशर्रफ ने ही कारगिल जंग की पाकिस्तान की ओर से साजिश की थी। 1999 में मार्च से मई तक, उन्होंने पाकिस्तानी सेना की उत्तरी लाइट इन्फैंट्री को कारगिल, जम्मू-कश्मीर में रणनीतिक चौकियों पर कब्जा करने का आदेश दिया था। घुसपैठ का पता चलने पर, भारतीय सेना ने पाकिस्तानी नियंत्रण से चौकियों पर जीत हासिल करने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया।

नवाज शरीफ ने किया था मुशर्रफ को बर्खास्त
अंतराष्ट्रीय दबाव के कारण नवाज शरीफ को सेना को नाराज करते हुए कारगिल की चोटियों से पाकिस्तानी सेना को वापस बुलाने का आदेश देना पड़ा था। 12 अक्टूबर 1999 को नवाज शरीफ ने मुशर्रफ को सेना प्रमुख के पद से बर्खास्त कर दिया था। पाकिस्तानी सेना ने एक रक्तहीन तख्तापलट किया, हवाई अड्डे और रेडियो स्टेशन पर कंट्रोल कर लिया था।

बंदूक की नोक पर हासिल की थी सत्ता
परवेज मुशर्रफ ने पाकिस्तान के मुख्य कार्यकारी के रूप में पदभार संभाला और शरीफ को उनके पद से हटा दिया। रफीक तरार के इस्तीफे के बाद, मुशर्रफ ने 2001 में खुद को पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया और 2008 तक इस पद पर रहे। 2008 में चुनावों के बाद महाभियोग का सामना करते हुए, मुशर्रफ को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा और दुबई में स्व-निर्वासित निर्वासन में चले गए।

मौत की सजा मिली थी मुशर्रफ को
2020 में, लाहौर हाई कोर्ट ने परवेज मुशर्रफ के खिलाफ नवाज शरीफ सरकार द्वारा की गई सभी कार्रवाइयों को "असंवैधानिक" घोषित किया था। परवेज मुशर्रफ पर राजद्रोह का आरोप था। ट्रायल कोर्ट ने परवेज मुशर्रफ को मौत की सजा सुनाई थी। 2019 में एक विशेष अदालत ने परवेज मुशर्रफ को मौत की सजा सुनाई थी।












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