पाकिस्तानी सेना में घमसान! टॉप जनरलों में मतभेद, महीनों से नहीं हुई अहम बैठक -रिपोर्ट
नई दिल्ली, 7 जुलाई: पाकिस्तानी सेना के टॉप जनरलों के बीच घमासान शुरू होने की खबरें हैं। जब से पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन हुआ है, वहां की सेना के संरचनात्मक ढांचे में कुछ बदलाव की बातें सामने आ रही हैं। टॉप जनरलों में खींचतान का सबसे बड़ा प्रमाण ये बताया जा रहा है कि कोर कमांडरों की होने वाली मासिक बैठक भी 114 दिनों से नहीं हो पाई है। जनरल कमर जावेद बाजवा ने ऐसी आखिरी मीटिंग पिछले 15 मार्च को ही बुलाई थी। ऊपर से पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की सरकार भी राजनीतिक और आर्थिक संकटों का सामना कर रही है, जिससे स्थिति और भी अनियंत्रित नजर आ रही है।

महीनों से नहीं हुई अहम बैठक -रिपोर्ट
न्यूज18 ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पाकिस्तानी सेना के कोर कमांडरों की हर महीने होने वाली कोर कमांडर कॉन्फ्रेंस (सीसीसी) पिछले तीन महीनों और 20 दिनों से नहीं आयोजित की गई है। इस वजह से कई तरह की अटकलें लग रही हैं। हालांकि, अप्रैल 2022 के बाद दो फॉर्मेशन कमांडरों की कांफ्रेंस आयोजित हुई है,लेकिन ये पारंपरिक वार्षिक कार्यक्रम हैं। सीसीसी ही एक ऐसा फोरम है, जहां वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों और आंतरिक और बाहरी सुरक्षा परिस्थियों को लेकर विस्तृत ब्रिफिंग होती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा के प्रबंधन की प्रगति को लेकर भी नियमित जानकारी साझा की जाती है।
टॉप जनरलों में मतभेद-रिपोर्ट
कुछ रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के टॉप जनरल में ' मतैक्य नहीं है'। यही नहीं सेना के बड़े जनरलों की राय देश में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन और मौजूदा राजनीतिक और आर्थिक स्थियों को लेकर भी बंटी हुई है। सूत्रों के मुताबिक 60%-70% मेजर जनरल नई पोस्टिंग, प्रमोशन, जिम्मेदारियों और ट्रांसफर के इंतजार में बैठे हैं। प्रमोशन की कवायद अप्रैल में ही शुरू होनी थी, लेकिन जनरल बाजवा ने पाकिस्तान के राजनीतिक संकट और सत्ता परिवर्तन की वजह से इसे टाल दिया था।
जनरल बाजवा को एक और विस्तार देने की भी अटकलें
सूत्रों का यह भी कहना है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने आर्मी चीफ जनरल बाजवा को एक और सेवा विस्तार देने का ऑफर दिया है। इसकी वजह ये है कि 2023 के अगस्त में आम चुनाव होने तक सरकार उनका समर्थन चाहती है। जनरल बाजवा का मौजूदा सेवा विस्तार इस साल नवंबर में खत्म हो रहा है। मौजूदा सरकार के लिए किसी नए आर्मी चीफ की नियुक्ति और उसकी घोषणा करना बहुत ही बड़ी चुनौती बन चुकी है। क्योंकि, सदन में इसके पास बहुत मामूली बहुमत है और विपक्ष से सिर्फ 2 वोटों का फर्क है।
सूत्रों ने यह भी कहा है कि निकट भविष्य में पाकिस्तानी राष्ट्रपति आरिफ अल्वी, पीएम शरीफ से नेशनल असेंबली में विश्वास मत हासिल करने को भी कह सकते हैं। उधर आईएमएफ से बेलआउट पैकेज मिलने में देरी की वजह से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रही है।












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