बलूचिस्तान का इतिहास-भूगोल और भारत से इसका नाता
इस्लामाबाद। नरेंद्र मोदी भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने आजादी की सालगिरह के मौके पर लाल किले से बलूचिस्तान का जिक्र किया। पीएम मोदी ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए यहां पर जारी मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात की।

हमेशा बलोचिस्तान से 'भागता' पाक
भाषण में बलूचिस्तान का जिक्र क्या आया देश में इसके बारे में चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोग इसका जिक्र करने पर पीएम मोदी की आलोचना कर रहे हैं तो कुछ पीएम मोदी को शाबाशी दे रहे हैं।
बलूचिस्तान अपने आप में एक ऐसा मुद्दा है जिसका जिक्र करने से पाकिस्तान हमेशा बचता आया है। कश्मीर के बहाने इंटरनेशनल कम्यूनिटी का ध्यान भारत पर केंद्रित करने की कोशिशों वाले पाक को इस मुद्दे पर घेरने की तैयारी हो चुकी
है। आइए आपको बलूचिस्तान से जुड़े कुछ खास तथ्यों के बारे में बताते हैं।
तीन हिस्सों में बंटा हुआ था बलूचिस्तान
- बलूचिस्तान की सीमाएं और इसका असर तीन देशों ईरान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान तक है।
- इस हिस्से पर हिंदुओं का और अफगानिस्तान के दक्षिण में स्थित जाबुल में बसे बौद्ध राजाओं का शासन था।
- 850 ईसवीं सदी में नॉर्दन ईरान से यहां पर मुसलमानों का आगमन हुआ।
- युद्ध में मुसलमानों ने हिंदुओं को हरा दिया और जो बचे थे वे पेशावर की ओर चले गए।
- 11वीं सदी में अफगानिस्तान में बचा हुआ हिंदुओं का साम्राज्य भी खत्म हो गया।
- वर्तमान में जो बलूचिस्तान है उसके हिस्से पर भारत का अधिकार था और दूसरे हिस्से पर कालात के खान राज करते थे।
- भारत और पाक के बंटवारे के समय खानात ने जिन्ना को अपनेे वकील के तौर पर नियुक्त किया।
- कहते हैं कि जिन्ना ने ब्रिटिश सरकार के सामने खान के केस को पेश करते समय सोने के सिक्के फीस के तौर पर लिए थे।
- 11 अगस्त 1947 को इस हिस्से में कालात का साम्राज्य कायम हो गया।
- भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बाद भारत और पाक के अलावा स्वतंत्र कालात भी अस्तित्व में आया।
- 22 अक्टूबर 1947 को पाक ने जम्मू कश्मीर में घुसपैठ की और वह असफल रहा।
- जम्मू कश्मीर में मुंह की खाने के बाद पाक बलूचिस्तान को पाक में मिलाने की कोशिशें करने लगा।
- बलूचिस्तान में नई विधानसभा बनी और विधायिका ने कहा कि बलूचिस्तान को पाक में नहीं मिलाया जाएगा।
- 11 अप्रैल 1948 को कालात को जबरदस्ती पाकिस्तान में मिला लिया गया।
- इसी समय खान के छोटे भाई ने विद्रोह कर दिया और समर्थकों के साथ अफगानिस्तान चले गए।
- यहां से उन्होंने पाक के गैर-कानूनी कब्जे के खिलाफ एक जंग छेड़ दी।
- वर्ष 1948 से लेकर आज तक वही जंग जारी है।
- 1948 के बाद 1958-1959, 1962-1963 और 1973-1977 तक युद्ध हुआ।
- वर्ष 2003 से यहां पर आतंकवाद का दौर शुरू हो गया और यह आज तक जारी है।
- बलूचिस्तान के नागरिकों के मुताबिक पाक इस हिस्से को हर मौलिक अधिकार से वंचित रखता है।
- बलूचिस्तान में अफगानिस्तान से आए शरणार्थियों के अलावा तालिबान के समर्थक भी रहते हैं।
- पाक पर पख्तून और पंजाबियों को बलोच नागरिकों के खिलाफ भड़काने का आरोप लगता आया है।
- पाक आर्मी पर युवाओं को हेलीकॉप्टर से नीचे फेंकने तक का आरोप।












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