क्या बापू के 'घर' में सेंध लगा पाएंगे अरविंद केजरीवाल
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। राजधानी की नई दिल्ली सीट महात्मा गांधी के कारण भी जानी जाती है। इस सीट के अंदर आने वाली दो जगहों में बापू रहे। कुछ समय रहे मंदिर मार्ग वाले वाल्मिकी मंदिर में और फिर 30 जनवरी 1948 तक रहे तीस जनवरी मार्ग वाले बिड़ला हाऊस में। इस लिए ये सवाल पूछा जा सकता है कि गांधी जी के घर में कौन जीतेगा।

नई दिल्ली सीट पर चुनावी घमासान दिलचस्प होने जा रहा है। इधर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अरविंद केजरीवाल को घेरने के लिए कांग्रेस ने किरण वालिया को और भाजपा ने नुपूर शर्मा को मैदान में उतारा है। दोनों जमकर प्रचार कर रहीं हैं।
दोनों के निशाने पर केजरीवाल ही हैं। केजरीवाल अपने क्षेत्र में कतई कैंपेन नहीं कर रहे। वे दिल्ली की सभी 70 सीटों में घूम रहे हैं। जानकार मानते हैं कि इसका उन्हें नुकसान हो सकता है। उन्हें बेहद आत्मविश्वास में रहना भी हानि पहुंचा सकता है। इधर से पहले भाजपा शाजिया इल्मी को भी लड़वाना चाहती थी। हालांकि शाजिया ने ट्वीट कर इस सीट से लड़ने से इनकार कर दिया था।
सरकारी कर्मियों का गढ़
गोल मार्केट सीट में सरकारी मुलाजिम ही मुख्य रूप से वोट हैं। समूचे लुटियन जोन का बड़ा हिस्सा इसमें आता है। जानकार मानते हैं कि सरकारी कर्मी भाजपा को वोट दे सकते हैं क्योंकि सरकार ने उनके लिए नए वेतन आयोग का गठन कर दिया है।
परेश रावल कैंपेन करते हुए
भाजपा उम्मीदवार के लिए इधर परेश रावल कैंपेन कर रहे हैं। अब भाजपा के बड़े नेता भी इधर कैंपेन करेंगे। नुपूर का सारा फोकस केजरीवाल के झूठे वादों पर हैं। वह कह रही हैं कि उन पर यकीन नहीं किया जा सकता।
हालांकि कांग्रेस की किरण वालिया पहले तो इधर से लड़ने के लिए तैय़ार नहीं थीं, पर बाद में वह मान गईं। अब वह तगड़ा प्रचार कर रही हैं। उनकी कैंपेन में तेजी आ गई है। उनकी कैंपेन में दिल्ली यूनिवर्सिटी के टीचर काफी एक्टिव हैं। किरण वालिया शीला सरकार में मंत्री रही हैं। प्रो. किरण वालिया ने मालवीय नगर सीट से 1998, 2003 और 2008 में जीती थी। पिछले चुनाव में आप के सोमनाथ भारती ने उन्हें मालवीय नगर हराया था।
कौन से मसले
सरकारी कर्मचारियों की बहुलता वाली इस सीट पर हर तबके के लोग पिछले एक साल से बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशानियों का सामना कर रहे हैं। किरण वालिया कहती हैं कि जनता अब कांग्रेस के साथ खड़ी है।
पिछले चुनाव में केजरीवाल ने नयी दिल्ली सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को पराजित किया था। परिसीमन के बाद 2008 में नई दिल्ली सीट बनने से पहले इस सीट का नाम गोल मार्केट था। इस पर 1993 में भाजपा के कीर्ति आजाद जीते थे जबकि दीक्षित ने 1998, 2003 और 2008 में जीत दर्ज की। खैर केजरीवाल भले ही इधर तगड़ा प्रचार ना कर रहे हों पर उन्हें यहां पर बाकी से इक्कीस ही माना जा रहा है।












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