केजरीवाल और केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आर.एम.लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने गृह सचिव के माध्यम से केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को तब नोटिस जारी किया, जब याचिकाकर्ता एम.एल.शर्मा ने तर्क दिया कि कानून बनाने वाला व्यक्ति कानून तोड़ने वाला नहीं हो सकता। इस पर न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कहा कि दोहरा चरित्र नहीं हो सकता है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस हफ्ते के आरंभ में दिल्ली पुलिस द्वारा उनके मंत्री का आदेश न मानने पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर धरना दिया था। दो पुलिसकर्मियों के छुट्टी पर भेजे जाने के बाद ही उनका धरना खत्म हुआ।
वकील एन.राजारामन की एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पूछा, "अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के लागू होने के बावजूद कानून प्रवर्तन एजेंसी/पुलिस ने क्यों गैरकानूनी ढंग से पांच या उससे अधिक लोगों को एकत्र होने दिया।" न्यायालय ने यह भी पूछा कि क्या पुलिस ने गैरकानूनी ढंग से एकत्र भीड़ को हटने के लिए कहने के बाद बलपूर्वक हटाने का प्रयास किया या नहीं और ऐसा करने के बाद भी भीड़ नहीं हटी।
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मामले पर जवाब देने के लिए न्यायालय ने केंद्र और दिल्ली सरकार को छह सप्ताह का समय दिया। गौर हो कि धरना प्रदर्शन के दौरान केजरीवाल और उनके सहयोगियों ने किसी भी कानून को मानने से इनकार कर दिया। केजरीवाल ने गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के खिलाफ असंदीय भाषा का इस्तेमाल किया था और कहा था कि अराजकता ही लोकतंत्र है।












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