मजदूरों के हाथ काटने पर कोर्ट ने आंध्र और उड़ीसा सरकार से मांगा जवाब

SC issues notice for Odisha and AP in hand chopping case
नई दिल्‍ली। उड़ीसा के कालांहांडी जिले में दो मजदूरों के हाथ काट देने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश और उड़ीसा सरकारों से जवाब मांगा है। गौर हो कि जयपटना के नुआपाड़ा गांव के रहने वाले मजदूर नीलाम्‍बर धांगड़ा माझी और पिआलू धांगड़ा माझी सहित अन्‍य दस मजदूरों को दलालों ने फसल कटाई के बाद आंध्र प्रदेश में जाकर काम करने के लिए 10 से 15 हजार रूपये दिये थे। फसल कटाई पूरी होने के पहले ही दलाल परमे राउत और केला राउत 12 मजदूरों को जीप में डालकर छत्‍तीस गढ़ ले जाने लगे जबकि मजदूरों को आंध्र में काम करने के पैसे दिये गये थे।

मजदूरों को जब पता चला कि उन्‍हें काम के लिए छत्‍तीसगढ़ ले जाया जा रहा है तो रायपुर से सीनापली जाते समय 12 में से दस मजदूर भाग निकले। लिहाजा दलालों ने मजदूर नीलांबर और पिआलू पर गुस्‍सा निकालते हुए उनके दाहिने हाथों की हथेली काट दी। बताया जाता है कि हाथ काटने से पहले दलालों ने मजदूरों से दो लाख रूपये मांगे जो कि मजदूरों को बतौर पेशगी दिये गये थे।

दलालों ने मजदूरों के हाथ काटते हुए कहा था कि अगर तुम लोग हमारे लिए काम नहीं कर सके तो किसी और के लिए काम नहीं सकोगे। 15 दिसंबर को हुई इस घटना के प्रकाश में आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हस्‍तक्षेप कर इस पर चार सप्‍ताह के भीतर राज्‍य सरकारों से जवाब मांगा।

यह ध्‍यान देने योग्‍य है कि हर साल कालाहांडी, नवापाड़ा और बेलांगीर जिलों से हजारों मजदूर आंध्र प्रदेश और छत्‍तीसगढ़ में ईंट भट्टियों में काम करने के लिए जाते हैं।

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