रणजीत सिंह डिसले : 7 करोड़ का ग्लोबल टीचर अवार्ड जीतने वाले पहले भारतीय बने, आधी राशि 8 देशों के लोगों में बांटेंगे
रणजीत सिंह डिसले ने जीता ग्लोबल टीचर अवार्ड
नई दिल्ली। सरकारी स्कूल के शिक्षक रणजीत सिंह डिसले ने कमाल कर दिखाया है। ये भारत के वो पहले टीचर बन गए हैं, जिन्हें ग्लोबल टीचर अवार्ड (Global Teacher Prize 2020) से सम्मानित किया गया है। ग्लोबल टीचर अवार्ड की प्राइज मनी दस लाख डॉलर (7.38 करोड़) है। रणजीत सिंह डिसले को ग्लोबल टीचर प्राइज बालिका शिक्षा में उल्लेखनीय कार्य के लिए दिया गया है। अवार्ड के मिलने के बाद रणजीत डिसले ने जो फैसला लिया है, उसकी दुनियाभर में चर्चा हो रही है। ये अपने अवार्ड की आधी राशि आठ देशों के लोगों में बांटेंगे।
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कौन हैं रणजीत सिंह डिसले?
बता दें कि रणजीत सिंह डिसले महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के खांडवी में जिला परिषद प्राइमरी स्कूल में शिक्षक हैं। इन्होंने बालिका शिक्षा में नवाचार किया है। खांडवी के सरकारी स्कूल की बच्चियां किताबों के साथ क्यूआरडी कोड स्कैन करके भी पढ़ाई करती हैं। शिक्षक रणजीत सिंह डिसले के प्रयासों का ही नतीजा है कि इस सरकारी स्कूल की बच्चियां ऑनलाइन अन्य देशों के स्कूली बच्चों से संवाद भी करती हैं। उनकी भाषा औरपढ़ाई समझने की कोशिश करती हैं। इसको रणजीत ने वर्चुयल फील्ड ट्रिप योजना का नाम दिया है।

क्या है ग्लोबल टीचर अवार्ड?
ग्लोबल टीचर प्राइज इंटरनेशनल स्तर का प्रतिष्ठित पुरस्कार है। वर्की फाउंडेशन की ओर से हर साल दुनियाभर से ऐसे एक शिक्षक को अवार्ड प्रदान किया जाता है जिसने अपने शिक्षा में उल्लेखनीय योगदान दिया हो और विशिष्ट मानदंडों को पूरा करता हो। एक मिलियन डॉलर की राशि वाले इस पुरस्कार के लिए दुनियाभर से शिक्षकों की प्रविष्टियां आती हैं। ग्लोबल टीचर अवार्ड 2020 के लिए दुनियाभर से 12 हजार शिक्षकों की प्रविष्टियां आई थीं।
ग्लोबल टीचर अवार्ड का इतिहास
वर्की फाउंडेशन द्वारा वर्ष 2015 में ग्लोबल टीचर प्राइज की शुरुआत की गई थी। अब तक यह पुरस्कार छह शिक्षकों को दिया जा चुका है। वर्ष 2015 में पहला ग्लोबल टीचर अवार्ड अमेरिका के टीचर नैंसी अटवेल को मिला था। वर्ष 2016 में दूसरा अवार्ड फिलिस्तीन की टीचर हनन अल हरोब को, वर्ष 2017 में तीसरा अवार्ड कनाडा के टीचर मैगी मैकडोन्नेल को, वर्ष 2018 में चौथा अवार्ड इंग्लैंड के एंड्रिया जाफिराकोउ को, वर्ष 2019 में पांचवां अवार्ड केन्या के पीटर ताबीची और वर्ष 2020 में छठा पुरस्कार भारत के रणजीत डिसले को मिला है।

रणजीत डिसले को क्यों मिला ग्लोबल टीचर प्राइज 2020?
मीडिया से बातचीत में रणजीत डिसले बताते हैं कि वे एक बार को सामान लाने दुकान पर गए थे। वहां उन्होंने दुकानदार को क्यूआरडी स्कैन करके डिजीटल पैमेंट पाते देखा तो रणजीत के दिमाग में क्यूआरडी कोड का इस्तेमाल बच्चियों की पढ़ाई में करने का विचार आया। ऐसे में रणजीत ने पुस्तक में गद्य भाग के वीडियो और कविताओं के ऑडियो फॉरमेट तैयार करवाए। पुरस्क में क्यूआरडी कोड भी छपवाया। जिसे स्कैन करने के बाद स्कूली बच्चियां न केवल पढ़ सकती हैं बल्कि देख और सुनकर भी पढ़ाई कर सकती हैं। रणजीत सिंह डिसले के इसी नवाचार के चलते उन्हें ग्लोबल टीचर अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

माइक्रोसॉफ्ट ने भी माना कमाल का आविष्कार
सरकारी स्कूल की लड़कियों को पढ़ाने के लिए टीचर रणजीत सिंह डिसले द्वारा किए गए इस अनूठे प्रयास की दुनियाभर में प्रशंसा हो रही है। आईटी कम्पनी माइक्रोसॉफ्ट ने रणजीत के नवाचार को कमाल का आविष्कार माना है। इसे माइक्रोसॉफ्ट ने 300 आविष्कारों की सूची में जगह दी है। रणजीत के इसी आइडिया पर अब 11 देशों के स्कूली बच्चों की किताबें तैयार की जा रही हैं।

इनमें बाटेंगे आधी इनामी राशि
ग्लोबल टीचर अवार्ड 2020 की घोषणा एक ऑनलाइन सेरेमनी में अभिनेता स्टीफ़न फ़्राई ने की। अवार्ड मिलते ही रणजीत सिंह डिसले ने अपने पुरस्कार की राशि 7.38 करोड़ में से आधी रकम टॉप दस स्थानों पर रहे उप विजेताओं में बांटने की घोषणा की। पुरस्कार की रक़म को बांटने का मतलब है कि पुरस्कार की रक़म का 40-40 हज़ार पाउंड (तक़रीबन 39-39 लाख रुपये) इटली, ब्राज़ील, वियतनाम, मलेशिया, नाइजीरिया, दक्षिण अफ़्रीका, दक्षिण कोरिया, अमेरिका व के उप-विजेताओं समेत ब्रिटेन के जेमी फ़्रॉस्ट के पास भी जाएंगे।












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