मैं निराशावादी नहीं, विकास के बारे में सोंचता हूं: नरेंद्र मोदी

Narendra Modi addresses FICCI meet in Gandhinagar, Gujarat
गांधीनगर। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार नरेंद्र मोदी ने गांधीनगर में फिक्‍की के एक सम्‍मेलन में संबोधित करते हुए अपनी पार्टी के विकास के एजेंडे सामने रखे। उन्‍होने कांग्रेस की निंदा करते हुए कहा कि अगर इस पार्टी ने देश के विकास के लिए बेहतर योजना बनाई होती तो आज देश के हालात अलग होते। देश में औद्योगिक माहौल की कमी है, न तो हमारे पास स्किल्‍ड मैनपावर है और न ही निवेश के लिए अनुकूल परिस्थितियां। उन्‍होने कहा कि पहले जरूरी है कि देश में हर गरीब को शिक्षा मिले और फिर उद्योगों की जरूरत के मुताबिक विश्‍वविद्यालय खोल कर युवाओं को शिक्षित किया जाए, जिससे देश का विकास हो। उन्‍होने उदाहरण देकर कहा कि रेलवे इतना बड़ा विभाग है, यहां मैनपावर की कमी है तो क्‍या देश के अलग अलग हिस्‍सों में ऐसे विश्‍वविद्यालय नहीं होने चाहिए जो कि स्किल्‍ड युवा तैयार करें, इससे युवाओं को नौकरी तो मिलेगी ही साथ ही सरकार को धन मिलेगा।

मोदी ने कहा कि आज औद्योगीकरण की बात की जाती है, पर हमारे देश में मोबाइल, लैपटॉप का उत्‍पादन क्‍यों नहीं किया जाता? मुझे लगता है कि देश में ऐसा माहौल तैयार करना चाहिए कि निजी कंपनियां व्‍यापार करने के साथ ही खुद निवेश भी करें, साथ ही देश प्रदेश की सरकारें कंपनियों की मदद करें, उन्‍हें जरूरी आधारभूत वस्‍तुएं उपलब्‍ध करवायें। मोदी ने जोर दिया कि जरूरत इस बात की है कि इंडस्‍ट्री के अनुसार ही हम स्किल्‍ड युवा तैयार करें।

मोदी के अनुसार हमारे देश में पर्यटन को बढ़ावा देने को बहुत कुछ है, अगर युवाओं को एक गाइड के रूप में विकसित करें तो उन्‍हें रोजगार तो मिलेगा ही साथ ही देश को धन भी मिलेगा। हमारे यहां रक्षा क्षेत्र के ज्‍यादातर उपकरण आयात किये जाते हैं, सेना में अफसरों की कमी है तो क्‍या हमें इस कमी को पूरा करने के लिए विश्‍वविद्यालय नहीं बनाने चाहिए, जिससे कि युवा आने वाले वक्‍त में सेना की जरूरतों को पूरा करें और देश को शक्तिशाली बनायें। मोदी का कहना है कि देश के विकास के लिए किसी बड़े विज़न की नहीं बल्कि छोटी छोटी पहल करने की जरूरत है।

मोदी ने यूपीए सरकार की निंदा भी की और कहा कि देश के नेतृत्‍व में कमिटमेंट का अभाव है, वह नहीं चाहता कि देश का विकास हो। मैं कभी निराश नहीं होता, कुछ लोग कहते हैं कि गिलास आधा भरा है, कुछ कहते हैं कि गिलास आधा खाली है, मैं तीसरी सोंच रखता हूं कि गिलास पूरा भरा है, आधा पानी से आधा हवा से।

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