Independence Day 2020 Special: किसान के 4 बेटों के बाद 7 पोते-पोती भी भारतीय सेना में भर्ती
नई दिल्ली। 15 अगस्त 2020 को भारत 74वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आइए इस मौके पर आपको मिलवाते हैं एक ऐसे परिवार से, जो देश सेवा की मिसाल है। यहां के सदस्यों में भारतीय सेना में भर्ती होने का जुनून है। इस बात का अंदाजा इससे लगा सकते हो कि अकेले के इस परिवार से 11 लोग फौजी बन चुके हैं।

झुंझुनूं का फौजी परिवार
यह परिवार राजस्थान के झुंझुनूं जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर अजीतगढ़ ग्राम पंचायत के गांव दीनवा का है। भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट पद से रिटायर हुए गोवर्धन हुड्डा ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में बयां किया अपने परिवार के सदस्यों का फौजी बनने का पूरा सफर।

किसका है ये फौजियों वाला परिवार
राजस्थान के जिस परिवार के सदस्यों की रगों में देश भक्ति का खून दौड़ रहा है, वो गांव दीनवा के कुमाराम हुड्डा का परिवार है। कुमाराम किसान थे। खेती बाड़ी करते थे, मगर चार बेटों को देश सेवा के संस्कार दिए। उसी परम्परा को अब कुमाराम के बेटों के बाद पोते-पोती आगे बढ़ा रहे हैं।

किसने किस पर किया ज्वाइन
कुमाराम के बेटे
1. हरजी राम हुड्डा वर्ष 1965 में आर्मी ज्वाइन की। 1978 में नायक पद से रिटायर हुए।
2. रामेश्वर लाल हुड्डा 1966 में टेरिटोरियल आर्मी में भर्ती हुए थे।
3. गोवर्धन राम हुड्डा नौसेना में भर्ती होकर वर्ष 2004 में लेफ्टिनेंट पद से रिटायर हुए।
4. पोकरराम हुड्डा 1975 में भारतीय सेना में सैनिक पद पर भर्ती हुए और सुबेदार बनकर रिटायर हुए।

कुमाराम के पोते-पोती
1. रचना पुत्री गोवर्धन राम वर्ष 2012 में भारतीय सेना में भर्ती हुई। वर्तमान में बतौर मेजर लेह लद्दाख में तैनात है।
2. राजेंद्र कुमार पुत्र हरजीराम भारतीय सेना में नायक हैं।
3. रणवीर पुत्र पोकरराम 1998 में भर्ती हुए थे। वर्तमान हवलदार हैं।
4. हरफूल पुत्र हरजीराम ने 2001 में इंडियन आर्मी ज्वाइन की। ये भी हवलदार हैं।
5. सुरेंद्र कुमार पुत्र रामेश्वर लाल भी 2001 में भर्ती हुए थे। वर्तमान में नायक के पद पर तैनात हैं।
6. राकेश कुमार पुत्र गोवर्धन राम 2003 में भर्ती हुए। वर्तमान में पेटी ऑफिसर के पद पर सेवाएं दे रहे हैं।
7. सुधीर कुमार राकेश के सगे भाई हैं। ये भी 2003 में भर्ती हुए और वर्तमान में पेटी ऑफिसर है।

फौजी का बेटा फौजी ही बनेगा
आखिर आपके परिवार से इतने सदस्य फौजी कैसे? इस सवाल का गोवर्धन हुड्डा बेहतरीन जवाब देते हैं। कहते हैं कि जैसे अमिताभ बच्चन का बेटा अभिषेक बच्चन भी पिता की तरह अभिनेता ही बना। या फिर किसी डॉक्टर का बेटा डॉक्टर ही बनता है। इसी तरह से हमारे परिवार में भी फौजी बनने की परम्परा है, जिसे बड़ी शिद्दत से निभाया जा रहा है।

भाइयों ने हर जंग में लिया हिस्सा
कुमाराम हुड्डा के परिवार से निकले फौजियों ने युद्धों में अदम्य साहस भी दिखाया है। चारों भाइयों ने जंग में भी हिस्सा लिया है। गोवर्धन हुड्डा बताते हैं कि उन्होंने भारत पाकिस्तान के बीच 1971 हुआ युद्ध लड़ा। हरजी राम ने 1965 के युद्ध में हिस्सा लिया और पोकरराम ने कारगिल जंग 1999 में पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब दिया।

हमें गर्व है इस परिवार पर
अजीतगढ़ के सरपंच रहे अशोक सिंह शेखावत बताते हैं कि ढाई घरों की आबादी वाले हमारे गांव की जनसंख्या करीब 700 लोग है। इनमें कुमाराम हुड्डा का परिवार फौजियों वाला है। छोटे गांव के एक ही परिवार से 11 फौजी होना हम सबके लिए गर्व की बात है।

दीनवा में और भी हैं ऐसे परिवार
गोवर्धन हुड्डा बताते हैं कि हमारे गांव में कई परिवारों में फौजी हैं, मगर एक साथ इतनी अधिक संख्या में हमारे परिवार के सदस्य ही लगे हैं। हमारे ही गांव के राजपूतों के परिवार में छह-सात भाई हैं। सभी इंडियन आर्मी ज्वाइन की।

सर्वाधिक फौजी झुंझुनूं जिले से
देश को सर्वाधिक फौजी राजस्थान का झुंझुनूं जिला देता है। यहां के घर-घर में फौजी और गांव-गांव में शहीद प्रतिमाएं इस बात का सबूत हैं कि झुंझुनूं के लोग देश सेवा में सबसे आगे हैं। यहां का गांव नुआं हो या धनूरी। इनमें कई पीढ़ियों से फौज में सेवाएं दी जा रही है।












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