ट्विटर पर 100K फॉलोअर होने पर छलका IPS का दर्द, बोले-'17 साल से जॉब, तनख्वाह 6 अंक से कम'
नई दिल्ली, 25 अप्रैल। भारतीय पुलिस सेवा के सूरज सिंह परिहार (IPS) ने ट्विटर हैंडल पर फॉलोअर की संख्या एक लाख होने का जश्न अनूठे अंदाज मनाया। इन्होंने फॉलोअर्स की तुलना अपने वेतन से कर डाली। आईपीएस सूरज सिंह परिहार ने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि 2005 से लगातार जॉब में हैं, अभी तनख्वाह की फिगर 6 डिजिट में पहुंचना बाकी है, लेकिन आईपीएस दीपांशु काबरा की प्रेरणा से हाल ही बनाए गए ट्विटर अकाउंट पर कुनबा 6 डिजिट पहुंच गया है।

दंतेवाड़ा पुलिस में एएसपी भी रहे
दरअसल, आईपीएस सूरज सिंह परिहार छत्तीसगढ़ गर्वनर के एडीसी हैं।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में प्रथम एसपी और दंतेवाड़ा पुलिस में एएसपी भी रह चुके हैं। इन्होंने अगस्त 2019 में ट्विटर ज्वाइन किया था।
सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें 2016 से लागू
सूरज सिंह परिहार के ट्वीट के बाद आईपीएस अधिकारियों के वेतन को लेकर चर्चा हो रही है। खासकर एक वरिष्ठ आईपीएस को भी 17 साल से नौकरी करने के बावजूद तनख्वाह एक लाख रुपए प्रतिमाह भी नहीं मिल रहा। जबकि सरकारी कर्मचारियों के सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें 2016 से लागू हैं।

IPS ऑफिसर्स का सैलरी-स्लैब
रैंक बेसिक पे (रुपये में)
DSP 56,100
ASP 67,700
SP 78,800
SSP 118,500
DIG 131,100
IG 144,200
ADGP 182,200
DGP 205,400-225,000

IPS के भत्ते व सुविधाएं
एक आईपीएस की सैलरी में कई पर्क्स होते हैं। नए-नए आईपीएस को भी कई सुविधाएं और भत्ते मिलते हैं। इनमें महंगाई भत्ता (DA), यात्रा भत्ता (TA), घर किराया भत्ता (HRA), ड्राइवर, चपरासी, घरेलू नौकर, निजी सहायक, आधिकारिक वाहन, रेजिडेंशल क्वार्टर्स (टाइप IV से लेकर टाइप VIII) या फिर HRA, CGHS मेडिकल सुविधा, ग्रैच्युटी, प्रॉविडेंट फंड (जहां IDA लागू हो), लीव इनकैशमेंट लीव ट्रेवल अलाउंस/टुअर अलाउंस शामिल है।

सूरज की सैलरी एक लाख से कम कैसे?
एक बात ध्यान रहे कि सूरज सिंह परिहार 2005 से जॉब कर रहे हैं मगर आईपीएस अधिकारी 2015 में बने। वह अभी एसपी रैंक में होंगे जिसके चलते उनका मूल वेतन एक लाख से ज्यादा नहीं होगा। हालांकि इसमें भत्ते व अन्य सुविधाएं जोड़ेंगे तो जरूरत रकम उससे ज्यादा हो जाएगी।

आईपीएस अधिकारी सूरज सिंह परिहार की जीवनी
बता दें कि आईपीएस सूरज सिंह परिहार मूलरूप उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं। इन्हें साल 2000 में राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय बाल श्री पुरस्कार भी मिल चुका है। 12वीं बोर्ड में परिहार ने टॉप किया था।
इनकी पढ़ाई कानपुर में हुई। घर खर्च चलाने के लिए दूसरों को अंग्रेजी बोलना सिखाने लगे। फिर नोएडा आकर अंग्रेजी कॉल सेंटर में नौकरी की। इसी दौरान यूपीएससी की तैयारी की। आईपीएस बनने से पहले बैंक मैनेजर के रूप में भी जॉब किया।

चौथे प्रयास में बने आईपीएस
सूरज सिंह परिहार चार बार के प्रयास में आईपीएस अधिकारी बने। साल 2011 में पहली बार में अफसल रहे। 2012 में मुख्य परीक्षा से आगे नहीं बढ़ सके। तीसरे प्रयास में उन्हें भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी बनने में सफलता मिली। 2015 में चौथे प्रयास में आईपीएस बने।












Click it and Unblock the Notifications