कोविड टेस्ट के लिए आपने भी कराया है होम कलेक्शन तो हो जाएं सावधान
नई दिल्ली, अप्रैल 28. कोरोना की दूसरी लहर की वजह से देश संकट में है। कोरोना संक्रमित मरीजों को अस्पताल में बेड नसीब नहीं हो रहे हैं, जिन्हें बेड मिल रहे हैं वो ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। श्मशान भूमियों के बाहर अंतिम संस्कार के लिए कतार में लगे शवों की तस्वीरें हर किसी को झकझोर रही हैं, मगर इस मुश्किल घड़ी में कुछ लोग अपनी इंसानियत को खुद ही मार रहे हैं।

ये लोग कोरोना वायरस की जांच रिपोर्ट के नाम पर लोगों के साथ धोखा कर रहे हैं। ये कोरोना टेस्ट के लिए होम कलेक्शन करवाने वालों को अधिक शिकार बना रहे हैं। गाजियाबाद और जयपुर में इस तरह के चौंकाने वाले मामले उजागर हो चुके हैं। आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है।
गाजियाबाद की महागुनपुरम सोसायटी का मामला
गाजियाबाद के महागुनपुरम में रहने वाले रोहित शर्मा के परिवार के साथ क्या हुआ। आईए जानते हैं खुद रोहित की जुबानी।
मैं रोहित शर्मा, विधी टॉवर महागुनपुरम का रहने वाले हूं। मैंने अपनी सोसाइटी के आर्केड में पैथोलॉजी कलेक्शन सेंटर चलाने वाले शख्स, जिसका नाम ललित है, को कोविड टेस्ट कराने के लिए बुलाया। मैंने उन्हें 22 अप्रैल को अपने घर पर कोविड-19 के परीक्षण की खातिर स्वाब नमूने लेने के लिए बुलाया। उन्होंने सरकारी रेट 900 रुपए की बजाय 1200 रुपए प्रति आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए। मेरे पिताजी पहले ही कोरोना संक्रमित हो चुके थे। इसलिए मैंने ललित को सबसे पहले मां रैपिड टेस्ट करने के लिए कहा। मां कोरोना पॉजिटिव निकलीं।
इसके बाद मैंने, आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए मेरी पत्नी और माँ के स्वाब का नमूना दिया। उसने लंंबी जद्दोजहद के बाद दो दिन बाद 24 तारीख को रात 10.30 बजे रिपोर्ट दी। जब मैंने रिपोर्ट पर क्यूआर कोड के साथ रिपोर्ट की जाँच की तो यह पता चला कि किसी ने तीनों रिपोर्ट में केवल नाम और आयु बदली की थी। मतलब रिपोर्ट फर्जी थी। किसी और की रिपोर्ट पर हम तीनों के नाम लिख दिए गए थे।
मैंने उसे एक और परीक्षण के लिए घर आने के लिए कहा। तब उसके सामने पूर्व की तीन रिपोर्ट फेक होने की आशंका जताई तो उसने स्वीकार किया कि उसने जो नमूने लिए थे, वे जांच के लिए किसी भी प्रयोगशाला में भेजे ही नहीं थे और नकली रिपोर्ट बनाकर दे दी। तुरंत पुलिस को बुलाकर उसे गिरफ्तार करा दिया गया।
जयपुर के मानसरोवर का मामला
इधर, राजस्थान की राजधानी जयपुर के मानसरोवर में डॉ. बीएल लैब व एबी डाइगोनिस्ट के दो कर्मचारियों को कोरोना की फर्जी रिपोर्ट बनाने के आरोप में पकड़ा गया है।
मीडिया से बातचीत में एसएचओ महावीर सिंह राठौड़ ने बताया कि सोमवार शाम को जयपुर के शिप्रापथ पुलिस थाने में शिकायत मिली कि लैब के लेटर हैड पर किसी ने कोरोना की फर्जी रिपोर्ट तैयार करके दे दी। पुलिस ने पूरे मामले की पड़ताल की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यहां की डॉ. बीएल लैब व एबी डाइगोनिस्ट के कर्मचारी अभिषेक और निखिल घर-घर जाकर कोरोना जांच के लिए सैंपल लेते थे। सैंपल को रास्ते में फेंक देते और कोरोना निगेटिव की फर्जी रिपोर्ट तैयार करते थे।
पुलिस पूछताछ में आरोपी पहले तो गुमराह करते रहे, मगर फिर सख्ती बरतने पर सच उगल दिया। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि पहले अभिषेक अपने साथी निखिल को वॉट्सऐप पर रिपोर्ट भेजता था। इसके बाद निखिल लैब में जाकर पुरानी रिपोर्ट को गूगल पर ऑनलाइन एप के जरिए बदलकर तैयार करता था। इसके बाद ये रिपोर्ट लोगों को भेजी जाती थी। लोगों से फर्जी रिपोर्ट के नाम पर मोटा पैसा भी वसूला जाता था।












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