सियासत की सड़क पर दौड़ रही ई-रिक्शा पर लगा बैन, कैसे होगी राजनीति?

दिल्ली की पूर्ववर्ती शीला दीक्षित सरकार जहां इसे पर्यावरण अनुकूल बताकर इसका शुभांरभ कर दिया। साल 2011 में दिल्ली की सड़कों पर ई-रिक्शा की शुरुआत हुई और देखते ही देखते दिल्ली की सड़कों पर ई-रिक्शा की भीड़ बढ़ने लगी। साथ ही ई-रिक्शा चालकों द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन तथा दुर्घटनाओं की शिकायतें भी आने लगीं। इसके बावजूद सरकार ने इनके नियमन के लिए कानून बनाना उचित नहीं समझा।
जब हाईकोर्ट के दखल के बाद परिवहन विभाग ने इस पर पाबंदी लगाने की कोशिश की तो आम आदमी पार्टी इसके खिलाफ सड़क पर उतर गई। इतना ही नहीं भाजपा ने तो रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित कर 650 वाट तक के ई-रिक्शा को मोटर व्हीकल एक्ट के दायरे में नहीं लाने की घोषणा कर दी। कहने का तात्पर्य की दिल्ली की ई-रिक्शा सियासत की सड़क पर धड़ल्ले से चलती रही, लेकिन अब हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए इसपर प्रतिबंधा जारी रखने का फैसला किया है।
क्या है फैसला
हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक राजधानी में ई रिक्शा पर प्रतिबंध जारी रहेगा। दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कर दिया कि ई रिक्शों के प्रचलन के लिए जबतक सरकार गाईिलाइन नहीं बनाती इसपर बैन जारी रहेगा। ई-रिक्शा को नियंत्रित करने के लिये दिशा निर्देशों के बगैर इन्हें चलाने की अनुमति नहीं दी सकती। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र को इस मुद्दे पर मसौदा नियम बनाने का निर्देश भी दिया है।
सरकार का रुख
दिल्ली सरकार और केंद्र की तरफ से पेश होने वाली अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल पिंकी आंनद ने कोर्ट के सामने दलील रखते हुए कहा कि ये मुद्दा करीब 50,000 ई-रिक्शा मालिकों की रोजी रोटी से जुड़ा हुआ है। ऐसे में दिल्ली पुलिस तथा निकाय एजेंसियों की निगरानी में उन्हें चलाने की अनुमति दी जाए।
क्या था मामला
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक हादसे के बाद 31 जुलाई को यह कहते हुए राष्ट्रीय राजधानी में ई रिक्शा चलाने पर पाबंदी का आदेश दिया था कि दिल्ली की सड़कों पर इनका अवैध रूप से परिचालन हो रहा है। कोर्ट ने ई रिक्शा से जुड़ी एक दर्दनाक घटना के कारण 3 साल के एक बच्चे की मौत और उसकी मां के घायल होने की खबरों का संज्ञान लेते हुए ई-रिक्शा पर बैन लगा दिया है।












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