बैन के खिलाफ एकजुट हुए ई-रिक्शा चालक, प्रदर्शन का दौर जारी

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नयी दिल्ली। पूर्वी दिल्ली में ई-रिक्शा के कारण 3 साल के मासूम की हुई मौत के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली की सड़कों से ई-रिक्शा को हटाने का आदेश दे दिया है। हादसे के बाद से ही ई-रिक्सा पर बैन लगा दिया गया है। हाई कोर्ट के फैसले के विरोध में बैटरी रिक्शा संघ ने जंतर मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया।

प्रतिबंद्ध के खिलाफ ये लोग एकजुट हो गए। इन लोगों का कहना था कि कोर्ट के फैसले से उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है और उनके पास कमाई कादूसरा कोई और साधन नहीं है। कोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे इन रिक्शा चालकों की अदालत और सरकार से मांग की है कि बैन को हटाकर उनके रेग्युलेशन का रास्ता साफ किया जाए। संघ के राष्ट्रीय संयोजक और बीजेपी नेता जयभगवान गोयल ने कहा कि ई-रिक्शा व्यवसाय से जुड़े करीब 10 लाख लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।

जून 2014 तक ई-रिक्शा चालकों पर 137 मामले दर्ज हो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि सिर्फ एक दुर्घटना के आधार पर सभी रिक्शों को हटाना सही नहीं है। अदालत ने फैसला करते समय इस व्यवसाय से जुड़े लाखों लोगों के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचा कि इसके बाद उनका भविष्य क्या होगा।

आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में अभी करीब 2 लाख बैटरी रिक्शा हैं और उन्हें चलाने वालों के परिवारों का पालन पोषण इन्हीं के माध्यम से हो रहा है। इस दुर्घटना के बाद ई-रिक्शा पर बैन लगा दिया गया है। हलांकि इससे पहले केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 16 जून को रामलीला मैदान में ई-रिक्शों को नियमित करने का आश्वासन दिया था।

प्रदर्शन कर रहे बैटरी रिक्शा संघ ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और उपराज्यपाल को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा है। संघ ने मांग की है कि अदालत इस फैसले पर पुनर्विचार करते हुए ई-रिक्शा से जुड़े लोगों को अंतरिम राहत प्रदान की जाए।

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