दिल्ली ब्लास्ट मामला: 12 साल जेल में बिताने के बाद मिली रिहाई, कहा- खुशनसीब महसूस कर रहा हूं

2005 के दिल्ली सीरियल ब्लास्ट मामले में बरी किए गए रफीक शाह ने कहा कि मैं चाहता हूं कि असली दोषी पकड़े जाएं, जिससे बम धमाके के पीड़ितों को न्याय मिल सके, जैसा कि मुझे मिला है।

नई दिल्ली। साल 2005 के दिल्ली सीरियल ब्लास्ट मामले में करीब 12 साल जेल की सजा काटने के बाद आखिरकार 34 वर्षीय मोहम्मद रफीक शाह को रिहाई मिल गई। रफीक शाह ने इस फैसले और जेल से रिहाई पर कहा कि मैं खुद को बेहद खुशनसीब समझता हूं। रफीक शाह उन तीन लोगों में शामिल है जिन्हें कोर्ट ने सबूतों को अभाव में रिहा करने का फैसला सुनाया।

12 साल बाद मिली जेल से रिहाई, कहा- खुशनसीब महसूस कर रहा हूं

2005 दिल्ली सीरियल ब्लास्ट में आरोपी थे रफीक शाह

2005 के दिल्ली सीरियल ब्लास्ट मामले में कोर्ट ने तीसरे आरोपी तारिक अहमद डार को बम धमाके में दोषी नहीं ठहरा के प्रतिबंधित ग्रुप से संबंध को लेकर दोषी ठहराया गया। तीनों पर 2008 में आतंकी साजिश रचने, हथियारों का संग्रह करने, हत्या और हत्या के प्रयास का आरोप था। हालांकि बचाव पक्ष ने केस को जीत लिया। अपने 147 पेज के फैसले में कोर्ट ने कहा कि जांच में कई सारी कमियां थी, जिसकी वजह से बचाव पक्ष को फायदा मिला। एनडीटीवी से बातचीत में रफीक शाह ने कहा कि 325 बचाव पक्ष के वकील पेश किए गए। मुझे उसी समय पता चल गया था कि ये लंबा समय लेगा लेकिन मैं ये जानता था कि इससे मैं छूट जरुर जाऊंगा। रफीक शाह ने कहा कि खुद को सकारात्मक बनाए रखने के लिए मैं कुरान पढ़ता था, साथ ही बैडमिंटन खेलता और दूसरी किताबें पढ़ता।

रफीक शाह ने कहा कि मैं चाहता हूं कि असली दोषी पकड़े जाएं। जिससे बम धमाके के पीड़ितों को न्याय मिल सके, जैसा कि मुझे मिला है। शाह को जब पकड़ा गया वो कश्मीर विश्वविद्यालय में इस्लामिक स्टडीज में मास्टर्स डिग्री की पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वो क्लास में थे जब ब्लास्ट हुआ, अटेंडेंस रिकॉर्ड इसके गवाह हैं लेकिन पुलिस ने उनकी नहीं सुनी। पुलिस ने उन्हें घर से गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी सफाई में कहा था कि मैं केवल एक बच्चे की तरह दिल्ली घूमने आया था और जेल के अलावा कभी भी आरोपियों से नहीं मिला। शाह ने अपनी मास्टर्स की डिग्री जेल में रहकर पूरी की। उन्होंने बताया कि वो उन युवाओं के लिए काम करना चाहते हैं जो निर्दोष हैं और आतंकी बताकर उन्हें गिरफ्तार किया गया। फिलहाल वह अपने माता-पिता के साथ ज्यादा समय बिताना चाहते हैं। साथ ही वो अपनी आगे की पढ़ाई को जारी रखेंगे।

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