Exclusive: दिल्ली विधानसभा चुनाव में होगा रिश्तों का खून
नई दिल्ली ( विवेक शुक्ला)। आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार रिश्तों की गरिमा तार-तार होगी। भाई-बहन और ससुर-दामाद जैसे करीबी संबंधी एक दूसरे पर कीचड़ उछालेंगे। ईस्ट दिल्ली की शाहदरा सीट पर इस बार भाई-बहन आमने सामने हैं। भाई जितेनद्र सिंह शंटी अकाली दल की टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। उन्हें भाजपा का समर्थन मिलेगा। यह तय है। वे निवर्तमान विधानसभा के सदस्य थे इसी सीट से।

पर इस बार उन्हें असली टक्कर देंगी उनकी अपनी बड़ी बहन प्रीति। प्रीति को राजधानी में महिला एक्टिविस्ट के रूप में जाना जाता है। वो दिलशाद गार्डन-विवेक विहार सीट से नगर निगम पार्षद हैं। वो बेहद जुझारू नेता हैं। एक दौर में दोनों भाई-बहन कांग्रेस में थे। बाद में दोनों ने कांग्रेस छोड़ दी। शंटी ने तो अकाली दल को ज्वाइन कर लिया, पर प्रीति ने किसी दल का दामन नहीं थमा। वो आजाद उमीदवार के ही चुनाव लड़ती रहीं।
भाई से कोई निजी विवाद नहीं
वन इंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका अपने भाई से कोई निजी विवाद नहीं है। वो क्षेत्र की जनता की मांग पर चुनाव लड़ने जा रही हैं। उधर, शंटी ने इस बारे में कुछ भी कहन से इंकार कर दिया।
उधर, दिल्ली भाजपा के शिखर नेता जगदीश मुखी को इस बार जनकपुरी में उनके अपना दामाद सुरेश कुमार टक्कर देने की तैयारी में हैं। कांग्रेस उन्हें टिकट दे सकती हैं। वो कांग्रेस से काफी समय से जुड़े हैं। कहने वाले कह रहे हैं कि अगर सुरेश कुमार को कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया तो वो आजाद उम्मीदवार के भी चुनाव लड़ सकते हैं।
दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत भाटिया कहते हैं कि सियासत में संबंधों का कोई मतलब नहीं है। पहले भी आपको अनेक उदाहरण मिल जाते हैं जब करीबी संबंधी चुनाव के मैदान में एक-दूसरे के खिलाफ उतरे हों। बहरहाल, एक बात साफ है कि इन चुनावों पर आने वाले समय में आम और खास सबकी नजरें रहेंगी।












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