दिल्ली: खफा विधायक खोल सकते हैं कांग्रेस की कलई
नई दिल्ली। जैसे-जैसे राजधानी में चुनाव की आहट तेज होती जा रही हैं, सियासी गलियारों से नई-नई खबरें आने का सिलसिला भी शुरु हो गया है। यदि भाजपा की अगुवाई में सरकार का गठन होता है तो आम आदमी पार्टी के अलावा कांग्रेस विधायक दल में भी हलचल मच सकती है।

प्रदेश नेतृत्व के सामने अपने सभी आठ विधायकों को पार्टी के झंडे तले एकजुट रखना दोनों पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसी चर्चा है कि सरकार बनाने की जारी कवायद के तहत कांग्रेस के विधायक भी निशाने पर हैं व इन्हें संभाले रखने के लिए कांग्रेस को एड़ी चेाटी का जोर लगाना पड़ सकता है।
सूबे में सरकार के गठन की चर्चा लगातार हो रही है, सबसे पहले कांग्रेस विधायकों के सहयोग से ही भाजपा द्वारा सरकार बनाने की चर्चा थी लेकिन करीब डेढ़-दो महीने बीतने के बावजूद जब सरकार नहीं बनी तो कांग्रेस के सभी विधायक एक साथ सामने आए और उन्होंने भाजपा के कयासों को खारिज कर दिया।
बीते दिनों कुमार विश्वास ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि वह उन्हें सीएम पद देकर अपने पाले में करना चाहती थी। जानकारों की मानें तो कांग्रेस के विधायक भी तत्काल चुनाव मैदान में नहीं जाना चाहते।
दिल्ली का 65 फीसद से अधिक बजट सामाजिक मद में है, लेकिन सरकारी सूत्रों के मुताबिक विधवा पेंशन व भोजन की गारंटी सहित अन्य योजनाओं पर तेजी से काम नहीं हो पा रहा है। जल्द ही शासन नई सरकार के लिए पहल कर सकता है।












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