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दिल्ली में सारा फोकस मुस्लिम-दलित बहुल्य सीटों पर

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। अब दिल्ली में सभी दलों के फोकस में हैं करीब दो दर्जन वे सीटें जहां पर मुसलमानों और दलितों के वोट अहम हैं। इन सीटों में एक दर्जन सीटें सुरक्षित हैं जबकि लगभग 13 सीटों में मुस्लिम मतदाताओं की मौजूदगी खासी हैं।

बेशक,अब तक हुए पांच चुनाव इसका गवाह रहे हैं कि जिस दल का इन सीटों पर कब्जा रहा है वही दल सत्ता के शिखर पर पहुंचा है। इससे पहले 15 साल तक सत्ता में रही कांग्रेस की झोली में ये सीटें रही हैं। लेकिन पिछले चुनाव में इन 27 सीटों में से कांग्रेस 8 पर सिमट गई जबकि आप और भाजपा के बीच इन सीटों का बंटवारा होने के फलस्वरूप त्रिशंकु विधानसभा की तस्वीर सामने आई।

सत्ता का रास्ता

बेशक, किसी भी दल के लिए 70 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का रास्ता इन्हीं सीटों से होकर जाएगा।वरिष्ठ राजनीतिक विशलेषक संजय वधावन कहते हैं कि भाजपा, आप और कांग्रेस को इन सीटों को फतेह करना होगा। ये इस दिशा में पूरी ताकत झोंक भी रही हैं।

कांग्रेस कहां रही तब

एक दर्जन सुरक्षित सीटों में से कांग्रेस के पास 2008 के चुनाव में 9 सीटें थीं जबकि भाजपा के पास दो और एक सीट बसपा के पास थीं। पिछले चुनाव में आप ने कांग्रेस से सभी 9 सीटें झटक ली। कांग्रेस के पास अब सिर्फ एक और भाजपा के पास दो सीटें हैं।

मुस्लिम बहुल सीटें

अगर मुस्लिम बहुलता वाली सीटों की बात करें तो इनमें से सात सीटें ओखला, बादली, गांधीनगर, मुस्तफाबाद, सीलमपुर, गांधीनगर और बल्लीमारन अभी कांग्रेस के पास हैं। मटियामहल से जीते शोएब इकबाल अब कांग्रेस में आ गए हैं।

इन सीटों पर कांग्रेस खुद को मजबूत मान रही है। हालांकि बाकी सीटों जैसे शाहदरा, सीमापुरी, बाबरपुर, किराड़ी, करावल नगर, त्रिलोकपुरी और संगम विहार में कांग्रेस को आप से कड़ी चुनौती मिल रही है।

मैदान में आईं शीला दीक्षित

इस बीच,पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पहली बार कांग्रेसी प्रत्याशी के प्रचार के लिए बाहर निकलीं। उन्होंने सीलमपुर विधानसभा से प्रत्याशी मतीन अहमद के पक्ष में प्रचार की शुरुआत करते हुए एक सभा को संबोधित किया। इस बार के विधानसभा चुनाव में यह उनकी पहली चुनावी सभा थी। सभा को संबोधित करते हुए शीला दीक्षित ने विकास का हवाला देते हुए कांग्रेस के पक्ष में वोट डालने की अपील की। उन्होंने कांग्रेसी प्रत्याशी के क्षेत्र में किए गए विकास के कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि मतीन पिछले दो कार्यकाल से इस क्षेत्र से विधायक रहे हैं।

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