विधायक जी की उपलब्धियां- 1 स्कूल, 4 शराब की दूकानें
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। 2008 से दिल्ली विधानसभा के मुस्तफाबाद विधानसभा सीट से सदस्य कांग्रेसी विधायक हसन अहमद के कार्यकाल का रजिस्टर अगर शोले के गब्बर सिंह के पास पहुंचता तो वो भी गुस्सा जाता और कहता, एक स्कूल और चार मॉडल शॉप... बहुत नाइंसाफी है! आ थू...
शायद यही कारण है कि इस बार कांग्रेस का इस सीट को निकालना कठिन हो रहा है। काम किया होता, विकास किया होता तो उन्हें जीतने की उम्मीद हो सकती थी। पिछले चुनाव की तरह इस बार भी इधर कांग्रेस, भाजपा और आमआदमी पार्टी के बीच ही मुख्य मुकाबला है।
जानकारों का कहना है कि हसन अहमद ने इधर अपने अब तक के कार्यकाल में एक स्कूल और चार शराब की दूकानें खुलवाईं। वे लोगों के लाख चाहने और मांग के बावजूद एक भी बैंक की ब्रांच खुलवा पाने में असफल रहे। इस बार हसन अहमद के लिए इस सीट पर कांग्रेस के ही कई असंतुष्ट नेताओं ने भी समस्या खड़ी की। आम आदमी पार्टी के चुनाव मैदान में उतरने से इस बार मुकाबला और रोचक होने की उम्मीद है।
अनधिकृत कॉलोनियों का गढ़
इधर लगभग सौ फीसदी इलाका अनधिकृत कॉलोनियों का है। दयालपुर और सादतपुर केरूप में दो गांव भी इस सीट का हिस्सा हैं। पिछले चुनाव में इधर सबने विकास के मुद्दे पर यह चुनाव लड़ा था।
बिजली देने का वादा
इनमें लोगों को 24 घंटे बिजली देने के साथ -साथ पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध कराना मुख्य मुद्दों में शामिल था। हसन अहमद दावा करते हैं कि उन्होंने शिव विहार टी - पॉइंट पर मिनी हॉस्पिटल का निर्माण कराया, मुस्तफाबाद की सभी गलियों को सीमेंटेड करवाया और इधर के सबसे बड़े कब्रिस्तान को ठीक करवाया।
हालांकि इन दावों को यहां के लोग मानने के लिए तैयार नहीं हैं। वे कहते हैं कि हसन अहमद इधर रहते ही नहीं। इस कारण से उनसे मिलना बहुत कठिन होता है। इधर के एक निवासी याकूब अली कहते हैं कि मेरे इलाके में पानी की सप्लाई बेहद खराब है। बहरहाल, मुस्तफाबाद में विकास नाम की कोई चीज नहीं दिखती। लगता है कि विधायक जी ने सिर्फ अपने मतदाताओं को बेवकूफ बनाया।













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