निएंडरथाल और आधुनिक मानव यूरोप में 2000 साल साथ रहे

आदिमानव से आधुनिक मानव तक की विकास यात्रा में कई प्रजातियां आईं और चली गईं. इनमें इंसान का सबसे करीबी पूर्वज है निएंडरथाल जो करीब 40 हजार साल पहले लुप्त हुआ. निएंडरथाल और होमो सेपियंस यानी आधुनिक मानव की प्रजाति धरती के कुछ हिस्सों में 2900 साल तक साथ रहे थे. इन प्रजातियों के साथ रहने के प्रमाण फ्रांस और उत्तरी स्पेन में मिले हैं. दोनों प्रजातियों को लंबे समय तक साथ रहने के कारण एक दूसरे से सीखने और मिलकर प्रजनन का भरपूर मौका मिला था.
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आधुनिक मानव और निएंडरथाल का संबंध
साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित नई रिसर्च रिपोर्ट में इस बात के सबूत नहीं हैं कि 42000 साल पहले आधुनिक मानव का निएंडरथाल से सीधा संपर्क था. हालांकि इससे पहले हुए जेनेटिक रिसर्चों ने दिखाया है कि किसी बिंदु पर दोनों के बीच सीधा संपर्क और मेलजोल रहा था.
इस साल चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले स्वीडिश जीवाश्मजीनविज्ञानी स्वांते पेबोकी खोज ने यह दिखाया है कि यूरोपीय लोगों और लगभग पूरी दुनिया के इंसानों में निएंडरथाल डीएनए का कुछ प्रतिशत हिस्सा मौजूद है.
नीदरलैंड्स की लीडेन यूनिवर्सिटी में पीएचडी के छात्र इगोर जाकोविच नई स्टडी के प्रमुख लेखक हैं. उनका कहना है कि आधुनिक मानव और निएंडरथाल "यूरोप में मिले और आपस में जुड़े थे, लेकिन हमें यह नहीं पता कि यह काम किस खास इलाके में हुआ था."
यह काम किस वक्त हुआ ठीक ठीक यह भी बता पाना थोड़ा मुश्किल है, हालांकि जीवाश्मों के पुराने अध्ययनों से ऐसी जानकारी मिली है कि आधुनिक मानव और निएंडरथाल धरती पर हजारों साल तक एक साथ मौजूद थे.

रेडियोकार्बन डेटिंग का सहारा
ज्यादा जानकारी जुटाने के लिए लीडेन यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में रिसर्चरों की टीम ने 56 प्राचीन नमूनों की रेडियोकार्बन डेटिंग का सहारा लिया. इनमें से 28 निएंडरथाल और इतने ही आधुनिक मानव के थे. इन्हें फ्रांस और उत्तरी स्पेन की 17 जगहों से जुटाया गया था. इन प्राचीन नमूनों में हड्डियां, पत्थरों के बने चाकू जैसी चीजें थीं, जिनके बारे में माना जाता है कि इलाके के निएंरथाल मानव ने बनाया था. रिसर्चरों ने संभावित तारीखों तक पहुंचने के लिए बायेजियन मॉडलिंग का सहारा लिया.
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इसके बाद उन्होंने मॉडलिंग की नयी तकनीक का इस्तेमाल किया जो बायोलॉजिकल कंजर्वेशन साइंसेज के आधार पर तैयार की गई है. यह इलाके में निएंडरथाल के रहने का सबसे सही आकलन करता है.
जाकोविच का कहना है कि इस तकनीक की "आधारभूत धारणा" है कि हम लुप्त हो चुकी प्रजाति के पहले या आखिरी सदस्य की शायद कभी खोज नहीं कर पायेंगे. जाकोविच ने उदाहरण दे कर समझाया, "हम आखिरी रोएंदार गैंडों का कभी पता नहीं लगा सकेंगे, हमारी समझ हमेशा टुकड़ों में बंटी रही है."

हर इंसान के डीएनए में निएंडरथाल
मॉडलिंग के जरिये पता चला है कि इस इलाके में निएंडरथाल 40,870 से 40,457 साल के बीच लुप्त हुए. आधुनिक मानव की उत्पत्ति 42,500 साल पहले हुई थी. इसका मतलब है कि दोनों प्रजातियां इस इलाके में 1400 से 2900 साल तक साथ रही थीं. इस दौरान दोनों प्रजातियों यानी निएंडरथाल और आधुनिक मानव के बीच विचारों का मेल हुआ था. यह वो समय था जब इंसानों के जीवन में कई तरह के बदलाव हो रहे थे और हथियार, औजार और आभूषण जैसी चीजों का विकास हो रहा था. निएंडरथाल की बनाई चीजों में इस बदलाव को देखा जा सकता है और वो आधुनिक मानव की बनाई चीजों से कई मामलों में मिलती जुलती हैं.
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संस्कृतियों में बदलाव और हमारे जीन्स के सबूतों की एक नई टाइमलाइन इस सिद्धांत को मजबूती दे सकती है कि निएंडरथाल का अंत आधुनिक मानव से संपर्क और संबंध के बाद हुआ. ज्यादा बड़ी आबादी वाले आधुनिक मानव के साथ प्रजनन से इसका अर्थ निकाला जा सकता है. जाकोविच का कहना है कि समय गुजरने के साथ निएंडरथाल, "आधुनिक मानव के जीन पूल में शामिल हो गये." जाकोविच ने यह भी कहा, "अब तक कि हमारी जो जानकारी है उसके साथ इसे मिला दें तो इसका मतलब है कि पृथ्वी पर मौजूद हर इंसान के डीएनए में कुछ हिस्सा निएंडरथाल का है और आप यह दलील दे सकते हैं कि वास्तव में निएंडरथाल पूरी तरह से कभी लुप्त हुए ही नहीं."
एनआर/ओएसजे (एएफपी)
Source: DW












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