मुजफ्फरनगर के मुस्लिम क्षेत्र में हिंदुओं के लिए 25 सालों से लगने वाला शिविर अब नहीं लगेगा, जानिए क्यों?
Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश का मुजफ्फरनगर जिला इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। राजनीति का केंद्र बना हुआ है। आए दिन किसी न किसी बड़े नेता का बयान यहां को लेकर आ रहा है। इसी बीच यहां की एक सामाजिक संस्था पैगाम ए इंसानियत ने भी प्रशासन द्वारा वर्तमान समय में होटलों और दुकानों पर नाम लिखवाए जाने का विरोध किया है। आसिफ रही जो पैगाम ए इंसानियत के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं विस्तार से अपना तर्क रखा।
जानकारी के मुताबिक, हरिद्वार से गंगाजल लेकर मुजफ्फरनगर होते हुए प्रत्येक वर्ष लाखो करोड़ो कांवड़िये मुजफ्फरनगर होते हुए अपने गंतव्य को जाते हैं। पिछले 25 सालों से इनकी सेवा करती आ रही मुस्लिम सामाजिक संस्था पैगाम ए इंसानियत ने प्रशासन के फैसले का विरोध करते हुए इस बार शिविर न लगाने का निर्णय किया।

संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष आसिफ रही ने कहा कि इस बार के कावड़ मेले में अपना कावड़ शिविर नहीं लगाएंगे। क्योंकि जिस तरह दुकानों पर नाम के बोर्ड प्रशासन द्वारा लगवाए गए हैं इस तरह अगर हम शिविर लगाते हैं तो हमें भी अपने गले में अपने नाम की तख्ती डालनी होगी।
हम पिछले 25 सालों से नगर में स्थित मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र मीनाक्षी चौक पर कावड़ शिविर लगाकर शिव भक्त कावड़ियों की कर रहे थे। लेकिन प्रशासन के इस फैसले के बाद आज पैगाम ए इंसानियत के सदस्यों द्वारा इस कावड़ मेले में अपना कावड़ शिविर नहीं लगाएंगे का निर्णय लिया गया है।
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उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रशासन दुकान होटल ढाबो यहां तक की फलों के ठेलों पर भी नाम के बोर्ड लगवाए जा रहा है तो अगर हम शिविर चलाते हैं तो हमें भी अपने गले में तख्ती डाल कर रखनी होगी।
उन्होंने कहा कि हमारा मकसद था मुजफ्फरनगर की धरती से भाईचारे को आगे बढ़ाया जाए। वह संदेश हमें पूरा होता नहीं दिख रहा है, जिसकी वजह से हमने अपने कदम पीछे हटा दिए।












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