श्रीकांत त्यागी ने कहा "समाज बदला लेगा", मुजफ्फरनगर में बीजेपी पर जमकर निकाली भड़ास
रविवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में स्थित कुतुबपुर गांव में श्रीकांत त्यागी पहुंचे जहां उन्होंने किसान नेता मांगेराम त्यागी के यहाँ त्यागी समाज के लोगों की एक सभा में हिस्सा लिया। इस सभा में श्रीकांत त्यागी ने बीजेपी के बहिष्कार का समर्थन करने के लिए पूरे त्याग समाज से अपील की है। त्यागी ने कहा कि समाज के जो प्रबुद्ध लोग हैं और भारतीय जनता पार्टी के साथ खड़े दिखाई देते थे, वो अब हमारे प्रकरण के बाद हमारे साथ हमारे समर्थन में होने वाली पंचायतों में खड़े होते हुए दिखाई दे रहे हैं।

बड़े फैसले लेने की समाज तैयारी कर रहा
मीडिया से बात करते हुए श्रीकांत त्यागी ने कहा कि मुजफ्फरनगर आने से पहले गाजियाबाद, मेरठ और आज मुजफ्फरनगर पहुंचा हूं मैं लगातार अपने समाज का दौरा कर रहा हूं। उसी क्रम में आज मुजफ्फरनगर के गांव कुतुबपुर में हमारे मांगेराम त्यागी ज़ी जों 52 दिनों तक हमारे लिए मेरठ में धरना प्रदर्शन पर रहे और धरने की अगुवाई कि इनके यहां समाज की एक सभा का आयोजन था इसमें भी आना हुआ। समाज बड़े पैमाने पर समर्थन दे रहा है। समाज के जो विचार-विमर्श है उनके जो वार्तालाप है उस पर चर्चा हो रही है कुछ बड़े फैसले लेने की समाज तैयारी कर रहा है। लोकसभा चुनाव से पहले मेरठ में एक बहुत बड़ी सभा करके उसमें जो निर्णय होंगे उनका खुलासा करेंगे और अपने समाज के लोगों से उसी समय अपील के माध्यम से उन निर्णय को लागू करने की कार्यवाही करेंगे।

बीजेपी के खिलाफ त्यागी समाज एकजुट?
2024 के चुनाव लड़ने के सवाल पर कहा कि 2024 का चुनाव तो 2024 में है लेकिन हम लोग तो अभी से समाज के बीच में है चुनाव सर्व समाज का होता है। वर्तमान में हमारे साथ जो घटना घटी उस घटना को लेकर समाज में बहुत रोष है। वर्तमान सरकार भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ समाज का 95 परसेंट लोग हैं। त्यागी,भूमिहार,मौईयार,चितवार और अयंगर सहित 14 उपनामों से जानी जाने वाली जाति और भगवान परशुराम के वंशज बड़े पैमाने पर भारतीय जनता पार्टी से परेशान है। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारतीय जनता पार्टी ने हमारे साथ व्यवहार किया है उससे हमारे समाज के भारतीय जनता पार्टी में छोटे से छोटा कार्यकर्ता भी अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहा है। इसी क्रम में समाज निर्णय ले रहा है और हमसे साझा कर रहा है। हम एक महासभा 2024 के चुनाव से पहले उसके बाद कहीं जाकर चुनाव तय होंगे।
जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी ने समाज को नकारने का काम किया है, गौतमबुद्धनगर में 8 लाख लोगों की संख्या को सरकार ने अनदेखा करने का काम किया है तो स्वाभाविक है समाज इसका तो बदला लेगा। समाज के जो प्रबुद्ध लोग हैं और भारतीय जनता पार्टी के साथ खड़े दिखाई देते थे हमारे प्रकरण के बाद आज वह हमारे साथ हमारे समर्थन में होने वाली पंचायतों में खड़े होते हुए दिखाई दे रहे हैं। हमारा समाज ही इतनी बड़ी पार्टी है कि उत्तर प्रदेश में 90 लाख की संख्या में हमारे समाज के लोग हैं। हम उनके बीच में जाकर उनका आशीर्वाद लेना का काम कर रहे हैं। यह वह समाज है जो सत्ता को बदलने की ताकत रखता है। इसके सामने चुनाव शब्द बहुत छोटा है।

जातिवाद का सहारा लेना कितना ठीक
भारत की जनता जातियों के आधार पर संगठित है। अतः न चाहते हुए भी राजनीति को जाती संस्था का उपयोग करना पड़ रहा है। अतः राजनीति में जातिवाद का आर्थिक कारण का राजनीतिकरण करना है। जाति को अपने दायरे से खींचकर राजनीति उसे अपने काम में लाने का प्रयास करते हैं। वहीं दूसरी तरफ राजनीति द्वारा जाति अथवा बिरादरी को देश की व्यवस्था में भाग लेने का मौका मिलता है। राजनीतिक नेता सत्ता प्राप्त करने के लिए जातीय संगठन का उपयोग करते हैं। जातियों के रूप में उनको बना बनाया संगठन अपने आप मिल जाता है। जिसका राजनीतिक संगठन में आसानी से परिवर्तन किया जा सकता है।
अब आप समझ ही गए होंगे की श्रीकांत त्यागी का ये कहना कि " हमारा समाज ही इतनी बड़ी पार्टी है कि उत्तर प्रदेश में 90 लाख की संख्या में हमारे समाज के लोग हैं। हम उनके बीच में जाकर उनका आशीर्वाद लेना का काम कर रहे हैं। यह वह समाज है जो सत्ता को बदलने की ताकत रखता है। इसके सामने चुनाव शब्द बहुत छोटा है।" गलत नहीं है। महिला के साथ बतमीजी के मामले में बीजेपी द्वारा श्रीकांत के खिलाफ लिए एक्शन का असर तो है ही पर कब तक एक अपराधी पूरे समाज का चोला ओढ़ कर अपने अपराध से बचता रहेगा।












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