शिवसेना ने भाजपा पर कसा जबरदस्त तंज, कहा- इस वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम घटा सकती है बीजेपी
भाजपा की विरोधी पार्टी शिवसेना ने शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर भाजपा पर जबरदस्त तंज कसा। शिवसेना ने कहा कि भाजपा 5 राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों को देखते हुए तेल के दामों में कटौती कर सकती है।
मुंबई। भाजपा की विरोधी पार्टी शिवसेना ने शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर भाजपा पर जबरदस्त तंज कसा। शिवसेना ने कहा कि भाजपा 5 राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों को देखते हुए तेल के दामों में कटौती कर सकती है। शिवसेना ने कहा कि विधानसभा चुनावों में भाजपा को तेल के बढ़ते दामों को लेकर कहीं मुश्किलों का सामना न करना पड़े इसलिए वह तेल के दाम घटा सकती है।

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शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा, 'सरकार को तेल के दाम गिराकर लोगों को कुछ पैसों की मदद करने के बजाय उन्हें पिछले एक साल में पेट्रोल-डीजल के दामों को बेहिसाब बढ़ाकर की गई अतिरिक्त कमाई का कुछ हिस्सा देना चाहिए।'
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मालूम हो कि गुरुवार को केंद्र सरकार ने पेट्रोल के दामों में 21 पैसे और डीजल के दामों में 20 पैसे की कटौती की थी। इससे एक दिन पहले यानी बुधवार को भी पेट्रोल के दाम 18 पैसे और डीजल के दामों में 17 पैसे की कमी की गई थी। यह कटौती 6 महीने के बाद पहली बार की गई थी। हालांकि लगातार दो दिन की कटौती के बाद शुक्रवार को तेल के दाम स्थिर रहे।
आज दिल्ली में पेट्रोल 90.78 रुपए प्रति लीटर और डीजल 81.10 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचा जा रहा है। जबकि मुंबई में पेट्रोल 97.19 रुपए प्रति लीटर और डीजल 88.20 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट के बाद राष्ट्रीय स्तर पर तेल के दामों में कमी की गई है।
मालूम हो कि पश्चिम बंगाल के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। शिवसेना ने तेल के दामों में गिरावट की लंबी अवधि पर भी संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल के दामों में आई 15 प्रतिशत की गिरावट की वजह से तेल के दाम कम हुए हैं। यदि कल को तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ जाते हैं तो क्या होगा। यानि जनता को दी गई यह राहत अस्थाई है।
शिवसेना ने आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टियों के तेल के बढ़ते दामों पर लगातार घेरे जाने के बावजूद भी केंद्र सरकार ने तेल के दामों में कटौती के लिए कोई इच्छाशक्ति नहीं दिखाई।












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