हारने के बाद भी हार नहीं मानेंगे राज ठाकरे
मुंबई। अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी कैसे मारी जाती है इस वाक्य को अगर ठीक से समझना है तो ज्यादा गहराई में जाने की जरूरत नहीं है महाराष्ट्र में राज ठाकरे इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरे हैं। लगातार मराठी संस्कृति की आड़ लेकर गैर मराठी लोगों के खिलाफ जहर उगलते रहने के कारण आज राज ठाकरे की महाराष्ट्र नव निर्माण सेना का अस्तित्व ही खतरे में है।

महाराष्ट्र में राग अलाप कर थोड़ी-थोड़ी बात पर दबंगई दिखाने वाले राज ठाकरे को जनता ने करारा जवाब दिया है। राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नव निर्माण सेना का अस्तित्व ही डूबने की कगार पर आ गया है। राज ठाकरे को विधानसभा की कुल 288 सीटों में से महज 1 सीट पर मुश्किल से जीत मिल पाई है।
रवैया भारी पड़ गया
उत्तर भारतीय लोगों के खिलाफ मराठी संस्कृति को बचाने की आड़ में हुड़दंग मचाने वाली पार्टी के रूप मेें महाराष्ट्र नव निर्माण सेना को पहचान मिली थी। अब इसी पहचान ने उसे डुबा दिया है। एमएनएस की करारी हार का कारण उसका यही उग्र रूप बताया जा रहा है। गौरतलब है कि राज ठाकरे पर गैर मराठी लोगों को पीटने और उनके खिलाफ अभद्र व्यवहार करने पर मामला चल रहा है।
मजबूरी है, राजनीति नहीं छोड़ेंगे!
राज ठाकरे चुनाव खुद इसलिए नहीं लड़े क्योंकि उनको इस बात की आशंका थी कि वह चुनाव में खड़े हुए तो वह हार सकते हैं। दरअसल, राजनीति में रहना राज ठाकरे के लिए मजबूरी बन चुका है। इसके दो कारण हैं। उद्धव ठाकरे और शिवसेना के सामने अपने आपको सिद्ध करना औऱ दूसरा, यह कि वह एक बिजनेसमैन भी हैं। सूत्रों के मुताबिक राज ठाकरे की यह दबंगई छवि उनके बिजनेस में काम करती है। वह महाराष्ट्र में ठेके लेते हैं। उनके सम्बन्ध बड़े-बड़े बिल्डरों से बताए जाते हैं। राजनीति अगर छोड़ते भी हैं तो उनको बड़े-बड़े ठेके मिलने में परेशानी होना तय है।












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