महराष्ट्र में बिखराव के बाद केंद्र में भी टूट जाएगी भाजपा
मुंबई। महाराष्ट्र में पच्चीस साल पुराना भाजपा-शिवसेना गठबंधन के टूटने का बुरा असर केंद्र में एनडीए के गठबंधन पर भी पड़ सकता है। दरअसल, जब से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी है तभी से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और अन्य गठबंधनों में एक मत नहीं बन पा रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि ऐसा इसलिए हो रहा है कि क्योंकि सारे फैसले नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की ओर से लिए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले बिहार में मजबूत नेता भाजपा का साथ छोड़ चुके हैं। जिससे भाजपा की बिहार में निचले तबके तक पहुंच थोड़ी कम हो गई है। नीतीश कुमार की ओर से भाजपा का साथ छोड़ देने से बिहार में छात्र जीवन से बिहार राजनीति में सक्रिय नेता लालू-नीतिश व कांग्रेस एक साथ आ गए हैं।
हो सकता है कि आगे भी अगर अंदरूनी मतभेद कायम रहे तो एनडीए में और फूट पड़ सकती है। जिसका नतीजा भाजपा को अकेला भी कर सकता है। वैसे भी भाजपा में कई वरिष्ठ नेता नरेंद्र मोदी नेतृत्व से रूठे हुए चल रहे हैं।
लोकसभा चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में सक्रिय रहे रामविलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी ने भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके पीछे भाजपा पर अत्याधिक विश्वास हो जाना था। अगर यह विश्वास कम हुआ तो पासवान जैसे नेता भी वापस गठबंधन तोड़ सकते हैं। वैसे भी यह दूसरी बार है जब पासवान भाजपा के पास वापस आए हैं। पहली बार पासवान ने नाराज होकर ही गठबंधन तोड़ा था।












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