अमेरिका के नए चुने गए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बेहतर है पीएम नरेंद्र मोदी: कन्हैया कुमार
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी के नए चुने गए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स बेहतर बताया है।
मुंबई। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी के नए चुने गए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स बेहतर बताया है। यह बात कन्हैया कुमार ने टाइम्स लिट फेस्ट में अपनी किताब 'फ्रॉम बिहार टू तिहाड़' को लेकर हो रहे पैनल डिस्कशन के दौरान बोल रहे थे।

अमेरिका में पहले ऐसा कभी नहीं हुआ
कन्हैया कुमार ने इस दौरान कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तमाम मतभेदों के बावजूद वो अमेरिका के नए चुने गए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बेहतर हैं। उन्होंने इस दौरान कहा कि पूरे विश्व में अधिनायकवादी नीतियों को लागू करने वाले नेताओं का जन्म आज के दौर में हो रहा है। कन्हैया ने कहा कि इस साल हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया वो अपने आप में शर्मिंदा करने वाला था। उन्होंने कहा कि पहली बार महिलाओं और प्रवासियों को लेकर इस तरह की बातों का प्रयोग किया गया। अमेरिका में हुए पहले के चुनावों में ऐसा कभी नहीं हुआ था।
विपक्ष कमजोर है
इस दौरान कन्हैया कुमार ने अफ्रीका-अमेरिकी नेता मार्टिन लूथर किंग की कही गई बातों का उदाहरण देते हुए बताया कि बुरे लोग इसलिए नहीं चिल्लाते कि वे शक्तिशाली हैं, बल्कि अच्छे लोगों के खामोश रहने से ऐसा होता है। उन्होंने जेएनयू छात्र नजीब अहमद के बारे में कहा कि सरकार कुछ करने के बजाए हमारे सामने मुद्दे बना रही है और ऐसा सिर्फ इसलिए हो पा रहा है क्योंकि हमारे पास मजबूत विपक्ष नहीं है जो सरकार की निगारी कर सके और मजबूती के साथ उसे चुनौती दे सके।
कई मुद्दों पर सरकार कर रही भ्रमित
कन्हैया ने दावा किया कि दादरी, जेएनयू में देशविरोधी नारेबाजी और नजीब अहमद का गायब होना, यह ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें भ्रमित किया जा रहा है। सच सामने नहीं आ पा रहा है।
कन्हैया ने कहा कि दादरी में इखलाक की हत्या के बाद यह यह पता लगाया जा रहा था कि मांस, गोमांस था या नहीं, वहीं हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला मामले क जांच कर रही एक सदस्यीय जांच कमेटी उसकी जाति का पता लगा रही थी।
कन्हैया ने सरकार पर सवाल भी उठाया कि आखिर नौ महीने बाद भी सरकार ने जेएनयू राष्ट्रविरोधी नारेबाजी के मामले में चार्जशीट दाखिल क्यों नहीं की।












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