महाराष्ट्र में कांग्रेस खेल रही मुस्लिम-मराठा कार्ड: विरोधीहुए खड़े

इसके बाद यह बहस शुरू हो गई कि लोकसभा में भाजपा के सामने करारी हार झेल चुकी कांग्रेस ने इसी साल के अंत में होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को देखते हुए के लिए दो विशेष समदुयाओं को लुभाने की कोशिश की है। जानकारी के मुताबिक सत्ताधारी कांग्रेस सरकार की ओर मुस्लिमों को पांच फीसदी और मराठी समुदाय को 16 फीसदी आरक्षण नौकरियों में देने की घोषणा कर दी है।
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क्यों शुरू किया गया था आरक्षण
आरक्षण को विशेष तौर पर अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के वर्ग का सरकारी क्षेत्रों में भागीदारी बढ़ने के लिए और इस निचले तबके को समृद्ध करने के उदेश्य को लेकर ही मुख्य रूप से आरक्षण का प्रावधान किया गया था। कई दलित चिंतक मानते हैं कि वर्तमान में आरक्षण का मुद्दे को वोट भुनाने के लिए विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लिए एक टूल के रूप में करने लगी हैं।
नीतीश जैसा हाल होने की आशंका
हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में जदयू की करारी हार की सबसे बड़ी वजह नीतीश कुमार का मुस्लिम कार्ड था। उन्होंने बिहार के मुसलमानों को रिझाने के लिये तमाम योजनाएं चलायीं और नरेंद्र मोदी पर वार करने के लिये बार-बार मुस्लिम कार्ड खेला। अब उसी राह पर महाराष्ट्र में कांग्रेस चल रही है। यानी कहीं न कहीं पृथ्वीराज चव्हाण का हाल नीतीश जैसा हो सकता है।












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