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'रहस्यमय तालाब' ने सुरंग के बाद उगले प्राचीन सिक्कें, कहीं दफन तो नही महाभारत का राज़ ?

उत्तरप्रदेश के मेरठ जनपद के मवाना क़स्बे में पक्का तालाब की खुदाई के दौरान एक महाराज को प्राचीन समय के सिक्कें मिलें हैं। खुदाई में मिले सिक्कों को महाभारत काल से जोड़कर देखा जा रहा हैं।

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उत्तरप्रदेश के मेरठ जनपद के मवाना क़स्बे में पक्का तालाब की खुदाई के दौरान एक महाराज को प्राचीन समय के सिक्कें मिलें हैं। जिन्हें उसने प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दिया हैं। खुदाई में मिले सिक्कों को महाभारत काल से जोड़कर देखा जा रहा हैं। इससे पहले इसी स्थान पर एक सुरंग होने की भी सूचना मिली थी। फिलहाल सिक्कों को पुरातत्व विभाग को सौंपा गया हैं।

प्राचीन सिक्कों की सूचना पर दौड़ी भीड़, पुलिस भी पहुंची

प्राचीन सिक्कों की सूचना पर दौड़ी भीड़, पुलिस भी पहुंची

दरअसल, मेरठ के मवाना कस्बे में स्थित पक्का तालाब में कुछ दिन पूर्व खुदाई के दौरान एक सुरंग मिलने की सूचना फैली थी। इस सुरंग को महाभारत काल की सुरंग से जोड़कर देखा जा रहा था। इसी के चलते गांव के ही एक महाराज रणधीर उपाध्याय सुरंग देखने पक्का तालाब पर पहुंचे। जहां उसे पुराने समय के 5 सिक्के पड़े हुए मिलें। जिन्हें लेकर वे तुरंत थाने में पहुंचा जहां एसडीएम भी मौजूद थे। महाराज रणधीर उपाध्याय ने उन सिक्कों को एसडीएम के सुपुर्द कर दिया हैं।
पुरातत्व विभाग उठाएगा राज से पर्दा, सौपें गए सिक्कें
वही एसडीएम ने खुदाई स्थल से मिले सिक्कों को पुरातत्व विभाग को सुपुर्द कर दिया हैं। अब पुरातत्व विभाग उन सिक्कों पर रिसर्च करेगा। जिसके बाद यह पुष्टि हो पाएगी कि सिक्के किस काल के हैं। यही नहीं, जिस सुरंग के होने की सूचना इस गांव में मिली थी, उसकी जांच में भी पुरातत्व विभाग की टीम जुटी हुई हैं। जैसे ही पुरातत्व विभाग की टीम की जांच रिपोर्ट सामने आएगी उसी के बाद इस राज से पर्दा उठ पाएगा।

सिक्कों से पहले मिली सुरंग, मवाना में दफन तो नही महाभारत का राज़

सिक्कों से पहले मिली सुरंग, मवाना में दफन तो नही महाभारत का राज़

बता दें कि पक्का तालाब स्थल से मिले इन सिक्कों पर मां दुर्गा और भगवान श्री कृष्ण की आकृति बनी हुई हैं। ग्रामीण इन सिक्कों को महाभारत काल से जोड़कर देख रहे हैं। साथ ही लोगों का अनुमान हैं कि यह सिक्कें जो महाराज रणधीर उपाध्याय को तालाब के पास से मिले हैं, वो महाभारत काल के ही हैं। क्योंकि इससे पहले भी गांव वालों ने इस तालाब के नीचे एक सुरंग होने की बात कही थी। फिलहाल अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया हैं कि ग्रामीणों का यह अनुमान सही है या नहीं लेकिन पुरातत्व विभाग ने तालाब के नीचे सुरंग में उस स्थान को अभी पानी का स्त्रोत्र बताया था।

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    मेरठ जिले के इर्दगिर्द मिल चुके हैं महाभारत के प्रमाण

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    दरअसल, मेरठ जनपद के आसपास का इलाका महाभारत कालीन माना जाता हैं। यहां इससे पहले भी महाभारत के कई प्रमाण मिल चुके हैं। इसको लेकर इतिहासकार भी कई बार इसकी पुष्टि कर चुके हैं कि यह इलाका महाभारत कालीन हैं। मेरठ से महज़ 40 किलोमीटर दूर बागपत जनपद जो पहले मेरठ का ही हिस्सा था। वहां का बरनावा में स्तिथ लाक्षागृह भी उसका एक उदाहरण हैं। जिसमे दर्योधन छलकपट कर उन्हें ज़िंदा जलाने का प्रयास किया था। इतना ही नहीं सिनौली गांव में भी रथ नुमा ढांचा मिला था। जिसे अर्जुन का रथ बताया जाता हैं। यही नहीं, इसके अलावा भी कई प्रमाण मिल चुके हैं। यही वजह है कि यहां पर मिलने वाले प्रमाण के बाद इतिहासकारों और पुरातत्व विभाग की रूचि बढ़ जाती हैं।

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