मेजर मयंक विश्नोई 16 दिन बाद मौत से हार गए जंग, शोपियां में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान हुए थे घायल
मेजर मयंक विश्नोई 16 दिन बाद मौत से हार गए जंग, शोपियां में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान हुए थे घायल
मेरठ, 11 सितंबर: जम्मू कश्मीर के शोपियां में 27 अगस्त को आतंकियों से हुई मुठभेड़ में मयंक विश्नोई गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनका इलाज उधमपुर के सैनिक अस्पताल में चल रहा था। जहां 16 दिन तक वह मौत से जंग लड़ते रहे और शनिवार (11 सितंबर) को हार गए। तो वहीं, मयंक विश्नोई की शहादत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। मयंक, उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले थे और 2010 में मेजर बने थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मयंक विश्नोई का पार्थिव शरीर रविवार (12 सितंबर) की सुबह मेरठ स्थित उनके आवास लाया जाएगा। इसके बाद सैन्य सम्मान के साथ शहीद मेजर को अंतिम विदाई दी जाएगी। कंकरखेड़ा क्षेत्र के शिवलोकपुरी निवासी रिटायर्ड सूबेदार वीरेंद्र विश्ननोई के बेटे मेजर मयंक (30) 2010 में आईएमए (IMA) देहरादून से पासआउट हुए थे। उनकी पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में थी। 27 अगस्त 2021 को जम्मू कश्मीर के शोपियां में आतंकियों से लोहा लेते हुए मेजर मयंक के सिर में गोली लगी।
इसके बाद सेना के अधिकारियों ने गंभीर हालत में मयंक को उधमपुर के सैनिक अस्पताल में भर्ती कराया। यहां इलाज के दौरान दौरान मौत हो गई। बेटे की शहादत की खबर सुनते ही परिवार में मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। आसपास के लोगों का भी शहीद के घर पहुंचना शुरू हो गया। लोग शहीद के परिवार को सांत्वना दे रहे हैं। बता दें कि मेजर मयंक के पिता और अन्य परिजन उधमपुर में ही हैं। घर पर रिश्तेदार और परिवार के अन्य सदस्य हैं। मेजर मयंक के मामा ऊषा ने बताया कि मयंक का बचपन से ही जुनून था कि उसे सेना में जाना है और देश की सेवा करनी है। मगर यह नहीं पता था कि 30 साल की उम्र में ही देश की खातिर शहीद हो जाएगा।
मेजर के चचेरे भाई अंकित विश्नोई ने बताया कि सेना की तरफ से बताया गया है कि अभी पार्थिव शरीर उधमपुर के मिलिट्री अस्पताल में है। रविवार सुबह पार्थिव शरीर मेरठ लाया जाएगा। जहां सैन्य सम्मान के साथ शहीद मेजर मयंक विश्नोई को अंतिम विदाई दी जाएगी। बता दें कि मेजर बेटे की शहादत की खबर सुनकर क्षेत्र के गणमान्य लोग भी उनके आवास पर परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे हैं।












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