Annu Rani ने 2500 रुपए में लिया था पहला भाला, खेत में की थी प्रैक्टिस, जानें टोक्यो ओलंपिक तक की कहानी
मेरठ, 01 जुलाई: 28 अगस्त 1992 को जन्मीं अन्नू रानी, अब टोक्यो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। अपने 12 साल के खेल करियर में अन्नू रानी ने आर्थिक समस्याओं को दरकिनार कर लाजवाब प्रदर्शन किया। अपने प्रदर्शन के बदौलत अन्नू को आखिरकार ओलंपिक का टिकट मिल ही गया। वहीं, अऩ्नू को ओलम्पिक टिकट मिलने से उनके गांव बहादुरपुर में ख़ुशी का ठिकाना नहीं है। मेरठ के बहादरपुर गांव की चकरोड से निकलकर अन्नू रानी अब टोक्यो ओलंपिक के लिए रवाना होंगी।

टोक्यो ओलंपिक में शामिल हुई अन्नू रानी
हाल ही में अन्नू रानी ने 63.24 मीटर भाला फेंककर नेशनल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता था। वह मात्र .77 मीटर से ओलंपिक क्वालिफाई करने से चूक गई थीं, लेकिन वर्ल्ड रैंकिंग के आधार पर टोक्यो ओलंपिक में शामिल होने का मौका आखिरकार मिल ही गया। वहीं, अन्नू के ओलंपिक में जाने की ख़बर से परिजनों की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं है। अन्नू के किसान पिता कहते हैं कि बेटी ज़रुर पदक लेकर लौटेगी और देश का मान बढ़ाएगी।

पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी है अन्नू रानी
अन्नू रानी मेरठ के बहादरपुर गांव की रहने वाली है। उनका जन्म 28 अगस्त 1992 में किसान अमरपाल सिंह के घर हुआ था। अन्नू रानी पांच बहन-भाइयों में सबसे छोटी हैं। अमरपाल सिंह ने बताया उनका भतीजा लाल बहादुर व बेटा उपेंद्र अच्छे धावक रहे हैं। वह खुद शॉटपुट खिलाड़ी रह चुके हैं। पिता की प्रेरणा से अन्नू रानी ने खेल के मैदान पर कदम रखा। अन्नू गांव की चकरोड और दबथुआ कॉलेज में अभ्यास करती थीं। शुरुआत में भाला फेंक के साथ गोला फेंक और चक्का फेंक में अभ्यास करती थीं। लेकिन आखिरकार उन्होंने भाला फेंक को अपना भविष्य चुना।

2500 रुपए में लिया था अन्नू अपना पहले भाला
अन्नू रानी के पिता अमरपाल सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि अन्नू को वह डेढ़ लाख रुपए का भाला दिलाने में असमर्थ थे। हालांकि, उन्होंने अन्नू को पहला भाला 2500 रुपए का दिलाया था। जिसके बाद अन्नू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कामयाबी हासिल की। पिता ने कहा उनकी बेटी ओलंपिक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेगी।

कद बन गया कामयाबी की सीढ़ी
अन्नू रानी का कद करीब साढ़े पांच फीट है, जबकि विदेशी महिला खिलाड़ियों का कद छह फीट से भी ऊपर है। अन्नू रानी कहा करती हैं कि भाला फेंक में दुनिया की सबसे छोटे कद की खिलाड़ी भले हों, लेकिन उनका क़द ही उनकी कामयाबी की सीढ़ी भी बना है। गुरुकुल प्रभात आश्रम के स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने उन्हें 2010 में डिस्कस व गोला फेंक के बजाए भाला फेंक पर फोकस करने की सलाह दी और इस सलाह ने अन्नू रानी की दुनिया ही बदल दी।

अन्नू रानी की खास उपलब्धियां
- 2014 एशियाई गेम्स में कांस्य
- 2014 कामनवेल्थ गेम्स में प्रतिभाग
- 2015 में एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य
- 2017 में एशियाई चैंपियनशिप में रजत
- वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में फाइनल में जगह पक्की करने वाली पहली भारतीय बनीं
- आठ बार की राष्ट्रीय रिकॉर्ड होल्डर एथलीट
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